ऐसे घटिया लोगों के रहते बेमानी है देश के भले की उम्मीद

ऐसे घटिया लोगों के रहते बेमानी है देश के भले की उम्मीद

 इस देश का चरित्र विरोधाभासी है। यहां देश की खातिर जान कुर्बान करने वाले हैं तो देश के काम में भी सरकारी धन से खुरचन निकाल कर अपनी जेबें भरते रहने वाले हरामखोर भी हैं। उन्हें कफनचोर कहा जाता है। यह सुनना पीड़ादायी है कि देश की रक्षा के लिए सीमा पर दुर्गम पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों पर प्रतिकूल मौसम में भी लगातार जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर की सीमाओं पर देश की रखवाली करने वाले हमारे जवानों को घटिया खाना मिल रहा है। बेहद दु:खद और त्रासदयी है यह खबर। लेकिन है सच। क्योंकि यह बात भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने संसद में पेश की रिपोर्ट में कही है। कैग ने सेना को फटकार लगाते हुए कहा है कि सैन्य प्रबंधन जवानों को बहुत खराब राशन मुहैया करा रहा है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जवानों को एक्सपायरी डेट गुजरने के बाद खाने के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। कैग के अनुसार कहा है कि उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिण की कमांड पर बहुत यादा कीमतों पर घटिया सामग्री पहुंचाई जा रही है। यह बदहाली है तब है जब 13 लाख जवानों पर भोजन का सालाना खर्च 15000 करोड़ है।दरअसल, सेना में खाने-पीने की सामग्री पहुंचाने के लिए यादा वेंडर नहीं है। सेना अभी भी कु छ चुनिंदा लोगों से यादा दामों पर खाने-पीने के जरूरी सामान खरीद रही है। यहां प्रतियोगी भावना नहीं होने से सेना बड़ी कीमत देकर भी ताजा राशन नहीं खरीद पा रही है। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय में भी सामंजस्य कमी को भी दुखद और निराशाजनक ही कहा जायेगा।
केग की रिपोर्ट में दर्ज यह बात भी ध्यान योग्य है कि 19000 करोड़ में खरीदे गए सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों और 900 करोड़ रु . में  14 अतिरिक्त डॉर्नियर विमानों को ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।कैग के अनुसार अनियमितताओं का हाल यह है कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) बगैर मिट्टी जांचे पुल बना रहा है। नतीजतन काम बंद करना पड़ता है। जिससे सरकार को २.५ क रोड़ का नुक सान हुआ। कैग की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि संसद की लेखा समिति ने २०११ में अपनी विस्तृत रिपोर्ट में भारतीय सेना में राशन की आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए १२ सिफारिशें दी थीं, मगर इनमें से सिर्फ २ सिफारिशें ही क्रि यांवित की गई।

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