‘एमएसजी’ के बाद अब ‘उड़ता पंजाब’!

‘एमएसजी’ के बाद अब ‘उड़ता पंजाब’!

Rajeev Ranjan Tiwaबीते वर्ष पूर्व डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड (एमएसजी) ने जिस तरह सेंसर बोर्ड में तूफान मचाया था, ठीक उसी राह पर अब उड़ता पंजाब भी चल पड़ा है। मैसेंजर ऑफ गॉड पर रोक को ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा हटाने से सेंसर बोर्ड में तूफान मच गया था। सेंसर बोर्ड अध्यक्ष लीला सैमसन के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद बोर्ड सदस्य इरा भास्कर ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया था। बाद में बोर्ड के 08 और सदस्यों राजीव मसंद, पंकज शर्मा, लोरा प्रभु, ममंग दाय, टीजी थायगराजन, शुभ्रा गुप्ता, शेखरबाबू कंचरेला और शाजी करूण ने भी इस्तीफा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया। इस्तीफे का कारण अपने काम में दखल को बताया गया। ठीक इसी तरह अब उड़ता पंजाब को लेकर भी सेंसर बोर्ड विवादों में घिरता दिख रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि एमएसजी प्रकरण पर सेंसर बोर्ड के चेयरमैन समेत आठ सदस्यों ने इस्तीफा दिया था, लेकिन उड़ता पंजाब सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी के पद की बलि ले सकता है। हालांकि निहलानी यह कहकर पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित की है कि वे पीएम के चमचे हैं। इससे सरकार की किरकिरी भी हो रही है। पंजाब में ड्रग्स समस्या को लेकर बनी फिल्म उड़ता पंजाब के रिलीज को लेकर चल रहा विवाद अब भी जारी है। सेंसर बोर्ड और फिल्म मेकर्स के बीच फिल्म का टाइटल बदलने और कुछ सीन्स हटाए जाने को लेकर बहस जारी है।
फिल्म उड़ता पंजाब पर छिड़े घमासान के बीच सूचना व प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया है कि सेंसर बोर्ड में बड़े बदलाव जल्द ही सामने आएंगे। फिल्म जगत को राहत के संकेत देते हुए सूचना व प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि फिल्म सर्टिफिकेशन के नियम को नरम होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा सर्टिफिकेशन के सिस्टम से वह खुश नहीं हैं। कहा कि श्याम बेनेगल द्वारा अच्छे से तैयार की गई रिपोर्ट है, उसका पहला हिस्सा जो मुझ तक पहुंचा है, उस पर विचार हो रहा है। अगले कुछ दिनों में हम कुछ बड़े बदलावों का ऐलान करेंगे। मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल की अगुवाई में बनी समिति ने कई बदलावों की सिफारिश की है। इसमें कुछ मूलभूत बदलाव भी हैं। सूचना व प्रसारण मंत्री के मुताबिक सही शब्द सर्टिफिकेशन है, सेंसरशिप नहीं। सर्टिफिकेशन नियमों को उदार होना चाहिए। नशे की लत में डूबे पंजाब के युवाओं की कहानी पर आधारित फिल्म उड़ता पंजाब सेंसर बोर्ड की खिड़की पर रुकी हुई है। बोर्ड चाहता है कि फिल्म में 89 कट मारे जाएं। निर्देशक अनुराग कश्यप इससे बिफरे हुए हैं। अनुराग ने फिल्म में कैंची चलाने से साफ इनकार कर दिया है। अनुराग बॉम्बे हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटा चुके हैं। पहली सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को नसीहत देते हुए कहा कि मौजूदा पीढ़ी कुछ मेच्योर चाहती है, इसमें इतना रोना धोना नहीं होना चाहिए। जस्टिस धर्माधिकारी ने नशे पर बनी उड़ता पंजाब की तुलना गो, गोवा, गॉन से करते हुए भी सेंसर बोर्ड से तल्ख सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि उस फिल्म में गोवा को ऐसी जगह के रूप में दिखाया है जहां लोग पार्टी करने और प्रतिबंधित ड्रग्स लेने के लिए जाते हैं।
उधर, सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी का आरोप है कि फिल्म देखकर ऐसा लगता है जैसे पंजाब का हर युवा नशा करता हो। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी और अकाली दल की सरकार के खिलाफ आप और कांग्रेस नशे को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। यह बात काफी हद तक सच है कि पंजाब के युवा बुरी तरह नशे की चपेट में हैं। निहलानी के मुताबिक ऐसा करके पंजाब के लोगों की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। सेंसर बोर्ड ने जो हिस्से काटने को कहा है, उन्हें हटाने के बाद फिल्म को रिलीज किया जा सकता है। निहलानी ने आरोप लगाया कि अनुराग कश्यप अपनी फिल्म को फायदा पहुंचाने के लिए विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि निहलानी किसी फिल्म को सेंसर करने को लेकर पहली बार विवादों में नहीं हैं। पिछले साल जनवरी में उन्हें सेंसर बोर्ड का प्रमुख बनाया गया था। उसके बाद से वह लगातार विवादों में घिरते रहे हैं। कुछ समय पहले आई फिल्म अलीगढ़ को ए सर्टिफिकेट देने को लेकर भी वह विवादों में थे और तब भी उन्होंने डायरेक्टर पर जानबूझ कर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया था। हालांकि 1990 के दशक में आईं उनकी फिल्मों को कुछ लोग अश्लील और फूहड़ बताते हैं, लेकिन वह फिल्मों में गालियों को हटाने से लेकर बॉन्ड फिल्म स्पेक्टर में किसिंग सीन डिलीट करने तक जैसे फरमान सुना चुके हैं, जो बड़ी संख्या में फिल्म दर्शकों और फिल्मकारों को नागवार गुजरे हैं। हाल ही में आई जंगलबुक टू को भी उन्होंने ए सर्टिफिकेट देकर आलोचना बटोरी।
वहीं दूसरी तरफ अनुराग कश्यप कहते हैं कि सेंसर बोर्ड चीफ पहलाज निहलानी ने 89 हिस्से या डायलॉग्स हटाने को कहा है। वह चाहते हैं कि फिल्म के नाम उड़ता पंजाब से पंजाब शब्द भी हटाया जाए। बॉलीवुड के कई फिल्मकार अनुराग कश्यप के पक्ष में खड़े हैं। निर्माता-निर्देशक कबीर खान ने कहा है कि फिल्म की रिलीज से 1० दिन पहले इस तरह दृश्यों को हटाने का दबाव बनाना सरासर नाजायज है। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड का काम फिल्म को सर्टिफिकेट देना है, उसे काटना नहीं। पिछले कुछ समय से पंजाब में नशीली दवाओं का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। खासकर पाकिस्तान से तस्करी बढऩे के बाद युवाओं में इसकी लत काफी बढ़ी है। अनुराग कश्यप की फिल्म इसी बारे में है। उन्होंने कहा कि उड़ता पंजाब से ज्यादा ईमानदार फिल्म कोई हो ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि फिल्म का विरोध करने वाले दरअसल नशे का समर्थन कर रहे हैं। इस पूरे विवाद का एक राजनीतिक कोण भी है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी नशीली दवाओं की बढ़ती लत को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी नेता ही ड्रग तस्करों को शह देते रहे हैं। पहलाज निहलानी ने यहां तक आरोप लगा दिया कि कश्यप ने आम आदमी पार्टी से पैसा लिया है। इस बात का कश्यप ने तीखा विरोध किया और माफी की मांग की। निहलानी ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।
बॉलीवुड फिल्मों को लेकर पहले भी सेंसर बोर्ड और प्रोड्यूसर्स में अनबन हो चुकी है। ये हैं वो फिल्में जिन पर सेंसर ने कैंची भी चलाई और बैन भी किया। फिल्म ब्लैक फाइडे (2004) मुम्बई 1993 वर्ष में हुए सीरियल बम धमाकों पर बनाई गई थी और यह फिल्म एक किताब पर आधारित थी। बताया जाता है कि संवेदनशील विषय और न्यायालय में विचाराधीन मामला होने के कारण फिल्म को न्यायालय का फैसला आने तक रोक लगाई गई थी। फिल्म बैंडिट क्वीन (1994) को सेंसर ने वल्गर कंटेंट के चलते बैन कर दिया था। फिल्म की कहानी फूलन देवी पर आधारित थी, जिसमें सेक्शुअल कंटेंट, न्यूडिटी और गाली गलौच भरी भाषा के चलते सेंसर ने आपत्ति जताई थी। फिल्म कामासूत्र (1996) मीरा नायर द्वारा निर्देशित फिल्म थी। इसमें अधिक उत्तेजक दृश्यों व अनैतिक संबंधों के कारण भारत के दर्शकों तक नहीं पहुंच पाई। हालांकि दुनिया के अन्य हिस्से में इस फिल्म के निर्देशक और कलाकारों के काम की खूब सराहना की गई। फिल्म परजानिया (2005) साल 2002 के गुजरात दंगों पर आधारित थी। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला फिर भी फिल्म सेंसर बोर्ड द्वारा बैन कर दी गई। फिल्म सिंस (2005) केरल के एक साधु की यात्रा की कहानी है। वासना की लालसा व अन्य दृश्यों के कारण व कैथोलिक समुदाय के विरोध के कारण फिल्म पर प्रतिबंध लगाया गया। फिल्म वॉटर (2005) हमेशा से ही विवादों से घिरी रही। ये फिल्म एक भारतीय विधवा महिला की जिंदगी पर आधारित थी। फिल्म फिराक (2008) भी गुजरात दंगों पर आधारित थी। नंदिता दास की इस फिल्म से हिंदू और मुसलमानों की भावनाएं आहत करने के लिए निंदा की गई और फिल्म को बैन कर दिया गया था। फिल्म अनफ्रीडम (2015) एक लेस्बियन प्रेम कहानी पर आधारित थी, जिसे भारत में बैन कर दिया गया। बहरहाल, देखना यह है कि उड़ता पंजाब का क्या होता है।
राजीव रंजन तिवारी

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