एक बार मेरी भी मान लो पंचो…!

एक बार मेरी भी मान लो पंचो…!

panchayatएक जाट ने सार्वजनिक स्थान पर भैंस  बाँधने  के लिये खूटा गाड़ रखा था। अन्य चौधरियो ने खूटा उखाड़ने का अनुरोध किया किन्तु जाट ने बात नहीं मानी। अन्त में पंचायत  बुलायी गयी।पंचो  ने जाट से कहा -तूने खूटा गलत जगह गाड़ रखा है।
जाट- मानता हूँ भाई।पन्च- खूटा यहाँ नहीं गाड़ना चाहिए था।
जाट- माना भाइ।पन्च- खूटे से टकरा कर बच्चों को चोट लग सकती है।
जाट- मानता हूं।पन्च- भैंस  सार्वजनिक स्थान पर गोबर करती है, गन्दगी  फैलती है।
जाट- मानता हूं।पन्च- भैंस बच्चों को सींग-पूँछ  भी मार देती है।
जाट- मानता हूं,मैंने तुम्हारी सभी बातें मानी। अब पंच लोगों मेरी एक ही बात मान लो।पंच – बताओ अपनी बात!!!
जाट- खूटा यहीं गडेगा ।।

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