एक बढिय़ा आउटिंग है शॉपिंग..एक अच्छा मूड लिफ्टर भी है ..!

एक बढिय़ा आउटिंग है शॉपिंग..एक अच्छा मूड लिफ्टर भी है ..!

 डिप्रेशन दूर करने का शापिंग एक बढिय़ा कारगर नुस्खा है। होम मेकर रायमा घोषाल कहती हैं कि घर के उबाऊ रूटीन को ब्रेक करने के लिए शॉपिंग की आउटिंग बहुत मजेदार लगती है, नई-नई चीजों को देखकर मन खुशी से भर उठता है। मार्केट की रौनक मूड एलीवेट कर देती है। वो आगे कहती हैं यह जरूरी नहीं कि पर्स खाली किया जाए। विंडो शॉपिंग से ही मन बहल जाता है।
शॉपिंग की आउटिंग के लिए आपको कोई लंबी प्लानिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती है। कोई बैंकॉक, मलेशिया, दुबई जाने की जरूरत नहीं। हो सकता है मार्केट आपके घर से वॉकिंग डिस्टेंस पर ही हो। पति की व्यस्तता से ऊबी पत्नियों के लिए शॉपिंग एक अच्छा मूड लिफ्टर है। शॉपिंग करने पर जरूरत की चीजें तो ली ही जाती हैं, आउटिंग भी बढिय़ा हो जाती है। चाहे उन्हें लिपस्टिक, नेलपॉलिश, इनरवीयर, बॉडीलोशंस जैसी छोटी-मोटी चीजें खरीदनी हों या बच्चे के लिए टॉफियां। बाहर की हवा खाने को मिल जाती है। इस आउटिंग का मजा यह भी है कि यहां सोशलाइजिंग भी हो जाती है। पहचान वाले मिल जायें तो ठीक नहीं तो तरह-तरह के लोग तो देखने को मिल ही जाते हैं। कभी-कभी अजनबी दोस्त भी बन जाते हैं। इसके अलावा यह एक एक्सपीरियंस भी है।
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शॉपिंग को इसीलिए ‘मूड बूस्टर’ कहा जाता है। इसके फील गुड फैक्टर को नकारा नहीं जा सकता मगर हर बात में जैसे बैलेंस जरूरी है, अति यहां भी अच्छी नहीं। बजट की बात हमेशा ध्यान में रखकर शॉपिंग पर निकलें।
‘बस यूंही’ शॉपिंग को बढिय़ा आउटिंग की तरह ही ले। किसी धमाका सेल, बाय वन गेट वन फ्री, बाय वन गेट थ्री फ्री जैसी स्कीमों के फेर में कभी न आयें। दुकानदार मुनाफा खाने बैठे हैं। वो अपना माल यूंही नहीं लुटाएंगे।
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इसी तरह एटीएम की सुविधा का भी सोच समझ कर इस्तेमाल करें। केवल अपना रौब दिखाने के लिए हर्गिज पैसे की बर्बादी पर उतारू न हो जाएं। पैसा आपकी सिक्योरिटी है, यह हमेशा याद रहे। भावावेश में की गई खरीदारी आपको फिनेंशियल मुसीबत में डाल सकती है। घर में कलह का कारण बन सकती है।
कोई सस्ती चीज पर मन आ गया है तो जरूर खरीद लें। ऐसी चीजें आपको भरपूर खुशी दे सकती हैं और यहां मामूली सी रकम खर्च होने पर कोई झमेला भी नहीं है। जीवन में छोटी-छोटी चीजें ही बड़ी-बड़ी खुशियां देती हैं, यह मूलमंत्र सदा गिरह बांधे रहें।
आप भी जरूर चलें इस नये ट्रेंड के साथ, इस नयी थेरेपी को अपनाकर। बोरियत को दूर और मूड को बूस्ट, यानी कि शॉपिंग को मानें आउटिंग मगर पैसे के स्मार्ट मैनेजमेंट के साथ।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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