एक खूबसूरत मंजऱ है मुगल गार्डन

एक खूबसूरत मंजऱ है मुगल गार्डन

मुग़ल बादशाहों को बाग़ लगवाने का बड़ा शौक था। उन्होंने न केवल स्वर्गतुल्य कश्मीर घाटी में बड़े-बड़े बाग़ लगवाए अपितु लाहौर व तत्कालीन राजधानी आगरा और दिल्ली में भी बहुत से बाग़ लगवाए। उन्होंने जितने भी कि़ले बनवाए, उन सब के अंदर भी ख़ूबसूरत बाग़-बग़ीचे लगवाए। इन्हीं मुग़लकालीन बाग़-बग़ीचों से प्रेरणा लेकर नई दिल्ली के प्रमुख वास्तुकार सर एडविन ल्यूटियंस ने राष्ट्रपति भवन परिसर (तत्कालीन वायसराय हाउस) में जो उद्यान बनवाया उसे ही मुग़ल गार्डन के नाम से जाना जाता है।
मुग़ल गार्डन लगभग पन्द्रह एकड़ में फैला हुआ है। यह मुख्य रूप से रेक्टेंगुलर, लॉन्ग तथा सर्कुलर गार्डन के रूप में बँटा हुआ है। इसका पहला भाग रेक्टेंगुलर अथवा आयताकार है। बाग़ के इस भाग में बाचों-बीच नहरें बनी हुई हैं तथा फव्वारे लगे हुए हैं। यहाँ सैंकड़ों प्रकार के फूल लगे हुए हैं।
मुगल गार्डन का दूसरा भाग लॉन्ग गार्डन है जो लंबाई में फैला हुआ है तथा ऊँची दीवारों से घिरा हुआ है। इसमें विशेष रूप से गुलाबों की क्यारियाँ बनी हैं। गार्डन का तीसरा भाग सर्कुलर गार्डन कहलाता है। सर्कुलर गार्डन को पर्ल या बटरफ्लाई गार्डन भी कहा जाता है। गोलाई के आकार में बना यह भाग रास्तों को छोड़कर चारों ओर फूलों की क्यारियों से घिरा है तथा इसके बाचों-बीच ख़ूबसूरत फव्वारा भी बना है जो इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देता है।
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मेन मुग़ल गार्डन में प्रवेश करने से पहले पर्यटकों को हर्बल गार्डन से होकर गुजऱना पड़ता है। हर्बल गार्डन में अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियाँ जैसे ब्राह्मी, एलोवेरा, सर्पगंधा, स्टीविया, तुलसी, शंखपुष्पी, कैमोमाइल आदि विशेष रूप से लगाई गई हैं। यहाँ हर्बल गार्डन के अतिरिक्त आध्यात्मिक, औषधीय तथा जैव विविधता वाले बग़ीचों के साथ-साथ एक नक्षत्र गार्डन भी निर्मित किया गया है जहाँ हमारे सौरमंडल में उपस्थित सत्ताइस नक्षत्रों के गुणों से मेल खाते सत्ताइस पेड़ लगाए गए हैं जैसे महुआ, कदंब, पीपल, अर्जुन, बेलपत्र, जामुन आदि।
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मेन मुग़ल गार्डन में जिस फूल की सबसे ज़्यादा प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं वो है गुलाब। यहाँ गुलाब की सैंकड़ों ड्डप्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। सफेद, लाल, गुलाबी, पीले, काले, नीले, नारंगी, हरे, जामुनी तथा अन्य कई आकर्षक रंगों व विभिन्न गंधों में यहाँ के गुलाब न केवल बसंत ऋतु में अपितु सारे साल आप का स्वागत करने को तत्पर रहते हैं। हर साल फरवरी तथा मार्च के महीनों में ख़ूबसूरत मुग़ल गार्डन आम दर्शकों के लिए खोल दिया जाता है। तब आप भी इसके अद्वितीय सौंदर्य को निहारने का आनंद उठा सकते हैं। क्यों न इस बार फरवरी-मार्च के महीनों में मनुष्य द्वारा कल्पित और निर्मित इस स्वर्ग को देखने का कार्यक्रम बना ही लिया जाए?
ह्म् शादाब जफर ‘शादाब’ 

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