ऊन खरीदते समय बरतें सावधानी.. अलग शान है हाथ से बने स्वेटरों की

ऊन खरीदते समय बरतें सावधानी.. अलग शान है हाथ से बने स्वेटरों की

ouni शीत ऋतु शुरू होते ही स्वेटरों की याद ताजा होने लगती है। वैसे तो बाजार में रेडीमेड स्वेटरों की कमी नहीं है, फिर भी हाथ से बने स्वेटरों की अलग शान है। हर उम्र के लोग हाथ से बने स्वेटर पहनना पसंद करते हैं। यदि हाथ से बना मनपसंद स्वेटर कहीं से गिफ्ट के रूप में मिल जायेे तो उसको पहनने का मजा ही कुछ अलग है। हाथ से स्वेटर बनाना कुछ महिलाओं का खास शौक होता है। वे अपने परिजनों को त्यौहार, जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि पर हाथ से बने स्वेटर भेंटस्वरूप देना पसंद करती हैं। इससे उन्हें अपनत्व की भावना महसूस होती है। लेने वाला यदि प्यारपूर्वक स्वीकार कर उसे पहनता है तो बनाने वाले की खुशी दोगुनी हो जाती है। कामकाजी और घरेलू महिलाएं अभी भी हाथ से स्वेटर बुनना पसंद करती हैं। घर के बने स्वेटर रेडीमेड स्वेटरों से अधिक गर्म होते हैं और उन्हें घर पर धोना भी आसान होता है। रेडीमेड स्वेटरों को ड्राइक्लीनिंग आदि करानी पड़ती है। हाथ से स्वेटर बनाने के लिए सबसे पहले ऊन की आवश्यकता पड़ती है। ऊन खरीदते समय कुछ खास बातों को ध्यान में रखते हुए ऊन की खरीदारी करनी चाहिए।
– स्वेटर पहनने वाले व्यक्ति की आयु को ध्यान में रखते हुए ऊन खरीदें।
– स्वेटर एक रंग का बनाना है, दो रंग का या दो से अधिक रंगों का।
– ऊन मोटी लेनी है या पतली।जैकी श्रॉफ की बेटी ने मचाया कहर, वायरल हो रही कृष्णा की ये हॉट बिकिनी फोटोज

– ऊन खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि हल्के वजन की ऊन कम खरीदें, भारी वजन वाली ऊन अधिक खरीदें।
– स्वेटर पहनने वाले व्यक्ति के रंग रूप और उसके व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए ऊन के रंग का चयन करें।
– छोटे बच्चों के लिए ( 2 साल तक) बेबी वूल से बने स्वेटर उत्तम रहते हैं। ऊन का रंग चुनते समय सॉफ्ट कलर्स का चयन करें।
– छोटे बच्चों को रेशेदार ऊन से बने स्वेटर न पहनाएं क्योंकि रेशे उनके मुंह में जा सकते हैं।
– 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए 4 प्लाई वाली ऊन से स्वेटर बनायें।
– मोटी ऊन वाले स्वेटर से कोमल त्वचा पर रेशेज भी पड़ सकते हैं।
– 6 से 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए मोटी-पतली दोनों तरह की ऊन के स्वेटर बना सकते हैं। इस आयु में बच्चों को गहरे रंग सुन्दर लगते हैं। दो और अधिक रंग से बने स्वेटर भी इस आयु के लिए उचित हैं।
– टीनएजर्स के लिए मध्यम रंग ठीक रहते हैं जो न तो अधिक गहरे हों, न ही एकदम फीके और चमकविहीन हों। इस उम्र के बच्चों को एक रंग में हल्के डिजाइन या दो रंग में हल्के-फुल्के डिजाइन वाले स्वेटर सुंदर लगते हैं। इस आयु के बच्चों के लिए पत्तों, जानवरों, पक्षियों वाले डिजाइन के स्वेटर न बनायें। दो रंग के स्ट्राइप वाले स्वेटर बना सकते हैं।
– युवा वर्ग के लोगों के लिए एक रंग में बुने हुए पुलोवर, कार्डीगन, आधे बाजू के जैकेट ही उचित लगते हैं।
– बड़े लोगों के लिए हल्के रंग के सादे स्वेटर बनायें।
– ऊन हमेशा अच्छी कंपनी की लें जिनके रंग न निकलें। रंग निकलने से इतने परिश्रम से बनाये स्वेटर बेरंग हो जायेंगे।
– केशमीलोन ऊन के रंग साधारणत: खराब नहीं होते।
– शुद्ध ऊन बुजुर्गों के लिए खरीदें।
– स्वेटर बनाते समय लम्बाई-चौड़ाई का विशेष ध्यान रखें, जिससे मेहनत व्यर्थ न जाये।
– ऊन के साथ नई सिलाइयों का भी अवश्य ध्यान रखें। सिलाईयां हमेशा ऊन के अनुसार लगायें।
– क्रोशिए की स्वेटर, शाल, जैकेट बनाते समय ऊन मोटी न खरीदें।
– नीतू गुप्ता

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