उदर रोगों की प्रभावशाली औषधि: ईसबगोल

उदर रोगों की प्रभावशाली औषधि: ईसबगोल

सभी बीमारियों का खजाना उदर अर्थात पेट को ही माना जाता है। खान-पान की अनियमितता, भारी, चिकना, रुखा भोजन करना, बिना पचे पुन: भोजन करना, अपनी प्रकृति के विरूद्ध भोजन करना, मल-मूत्र के वेगों को रोकना, शोक-चिंता अधिक करने आदि कारणों से पक्वाशय की दूषित वायु पेट की आंतडिय़ों में कृमियों को पैदा कर देती है तथा अन्य उपद्रव करके पेट की अनेक बीमारियों को पैदा कर देती है।
उदर रोगों में कब्ज को प्रमुख माना जाता है। कब्ज के कारण पेट में गैस बनने लगती है तथा बदहजमी, अपच जैसी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। पेट के अनेक रोगों में ईसबगोल की भूसी अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। इसे हर उम्र के लिए, बच्चों एवं वृद्धों तक सभी को नि:संकोच दिया जा सकता है। इससे हानि की आशंका नहीं रहती।
ईसबगोल की भूसी को रात में उचित मात्र के पानी में घोल कर पीते रहने से आंतड़ी का मार्ग चिकना बना रहता है। यह आंतों में फूलकर उसमें स्थित मल को अच्छी तरह बाहर निकाल डालता है। इसके नियमित सेवन से जुलाब की आवश्यकता नहीं होती। अगर अनपच के कारण आंव की या शिकायत हो तो इसके निरंतर सेवन से तुरंत लाभ पहुंचता है।
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ईसबगोल की दो-तीन चम्मच भूसी को पाव भर गर्म दूध में स्वादानुसार शक्कर मिलाकर खाते रहने से कब्ज नहीं होता। इसे रात में सोने से पहले लेते रहने से प्रात: काल बंधा हुआ मल निकलकर पेट पूरी तरह साफ हो जाता है। दस्त या पेचिश होने की स्थिति में ईसबगोल का सेवन दही के साथ मिलाकर करने से फायदा होता है।
अतिसार होने पर दो चम्मच ईसबगोल की भूसी को सौ ग्राम दही में घोलकर सायं-प्रात: खाने से दस्त बंद हो जाते हैं। इसके सेवन से यह मल को गाढ़ा करती है जिससे आंतों का कष्ट कम होता है। दो चम्मच ईसबगोल की भूसी को पांच-छह घण्टे तक पानी में भिगोकर इसे रात में पानी में अच्छी तरह मिलाकर इसमें थोड़ी मिश्री डालकर जल के साथ सेवन करते रहने से दस्त साफ होता है।
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शरीर में कच्चा आंव बढ़ जाता है और पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है। इस प्रकार के कष्ट होने पर ईसबगोल की भूसी के एक गिलास शरबत में दो चम्मच पुदीने की पत्तियों के रस को डालकर नियमित रूप से पीते रहने पर अत्यन्त लाभ होता है।
आंव के अधिक आते रहने से आंतडिय़ों में सूजन आ जाती है तथा कब्ज भी रहने लगता है। गैस की तकलीफ बढ़ जाती है। कमर की पीड़ा, अनिद्रा, सिर-दर्द आदि रोग पैदा हो जाते हैं। इन सब तकलीफों से बचने के लिए नियमित रूप से ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करते रहना चाहिए।
यह कहना कतई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ईसबगोल उदर रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।
– आनंद कु. अनंत

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