उचित भोजन बनाता है उत्तम स्वास्थ्य

उचित भोजन बनाता है उत्तम स्वास्थ्य

lunch_1उचित भोजन (मात्रा एवं विधि) उत्तम स्वास्थ्य बनाता है जबकि अनुचित भोजन स्वस्थ व्यक्ति को भी अस्वस्थ बना देता है, इसलिए भोजन वही खाएं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित हो।
– भोजन को जल्दी में निगल कर न खाएं। भोजन चबा-चबा कर खाना ही उत्तम स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है।
– जब भूख न हो तो बार बार भोजन का सेवन न करें। भोजन हमेशा तेज भूख लगने पर ही लें। दो मुख्य भोजनों के बीच में पर्याप्त समय का अंतर दें।
– भोजन में फलों एवं सब्जियों को प्रमुख स्थान दें। जूसी और रेशेदार फल स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं। हरी सब्जियां मनुष्य को प्राकृतिक नमक प्रदान करती हैं। इनका सेवन अवश्य करें।
– स्वंय को कभी जिह्वा का दास न बनायें। भोजन यदि स्वादिष्ट भी हो तो भी नियंत्रण में भोजन लें। अंधाधुंध अनियंत्रित भोजन स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालता है।
– खाने में बहुत सी वस्तुओं को एक साथ खाने से परहेज रखें।
– उत्तम स्वास्थ्य के लिए चोकर सहित आटा और छिलके वाली दाल का सेवन करें।
– पानी का सेवन भोजन से आधा घंटा पूर्व या खाने के एक डेढ़ घंटे बाद करें। भोजन के बीच पानी न पिएं।
– भोजन करने का समय एक ही रखें। अलग अलग समय में भोजन करने से दो भोजन के बीच का अन्तराल ठीक नहीं रहता। फिर खाने के समय भूख महसूस नहीं होती। यदि एक ही समय पर खायेंगे तो भूख ठीक समय पर ही लगेगी।
– नाश्ता अवश्य लें। अपनी इच्छानुसार दूध, फल, जूस, पोहे, दलिया, अंडा, ब्रेड आदि नाश्ते में लें।
– दोपहर को घी-तेल से बना भोजन खायें परन्तु रात्रि में अधिक तेल घी और मसालों वाले भोजन से परहेज़ करें।
– रात्रि में भोजन 8 बजे तक कर लें। अधिक देर से खाया भोजन पचने में मुश्किल पैदा करता है।
– जो लोग फल-सब्जियां छिलके समेत खा सकते हैं उन्हें अच्छी तरह धो पोंछ कर छिलके समेत खाएं।
– पतले होने के लिए क्र ैश डायटिंग न करें। इससे आपकी पाचन शक्ति बिगड़ सकती है।
– अधिक ठूंस कर खाना या ज्यादा समय तक पेट खाली रखना दोनों ही सेहत के लिए नुक्सानदायक हैं।
– भोजन शांत मन से बनायें, खिलायें और खाएं। इसका प्रभाव भोजन पर पड़ता है।
– टी. वी. देखते समय और बातें करते समय भोजन का सेवन नुक्सान पहुंचाता है। टी. वी. देखते हुए आपको पता ही नहीं चलेगा कि कितना खाया है। बातें करते समय भोजन सांस की नाली में फंस सकता है।
-सुनीता गाबा

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