ईकोफ्रैंडली डिजाइनर घर

ईकोफ्रैंडली डिजाइनर घर

घर ही एक ऐसी जगह होती है जहां हर व्यक्ति अपनी सारी चिंताओं, परेशानियों को भूल कर कुछ पल सुकून के गुजारता है पर घर में सुकून के पल तभी मिलेंगे जब आपका घर सुविधाजनक और डिजाइनर होगा। काली कट के डिजाइनर और वास्तुकार मिलिंद कुमार कृष्णा कहते हैं, ‘आज हर घर डिजाइनर घर है। घर में डिजाइनर फैक्टर असली हीरो है।’
ईकोफ्रैंडली घर का क्रेज: केरल हमेशा इकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर के लिए आगे रहा है पर कुछ समय से ईकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर को पीछे रख कर वैस्टर्न स्टाइल के आर्किटैक्चर की नकल की जाने लगी है। साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि ऐसी संरचनाओं का निर्माण करने से जमीन पर असर न पड़े। बहुत से लोग तो आजकल पुराने व नए जमाने के स्टाइल के फ्यूजन वाले घर बनवा रहे हैं मगर सबसे जरूरी और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आजकल बहुत से लोग विशेष रूप से ऐसे घरों में पैसा लगाना चाहते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित हों।
कोचीन के वास्तुकार मिंटो सिंधु कहते हैं कि अब समकालीन शैली केरल पहुंच गई है। यह शैली समय और पैसा बचाने में काफी प्रभावी है। अब यूरोपियन निर्माण शैली में भी केरल में एनआरआई संख्या की वजह से काफी आगे है।
शौक अपने-अपने

जिन डिजाइनों में अधिक ऊर्जा की बचत का विकल्प होता है और जो ईकोफ्रैंडली सामग्री से बने होते हैं, उनका चलन अधिक है। इस बात को मानना होगा कि किसी भी सोसाइटी का आर्किटैक्चर वहां के सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों को दर्शाता है। केरल में एनआरआई का पैसा ही वहां स्टाइल्स का निर्धारण कर रहा है।
छोटी जगह में भी खुश: आजकल कुछ लोग 100 वर्गफुट में भी रह कर खुश हैं क्योंकि उन्हें उसी में मॉडर्न समय की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे घर भी भारत में बहुत लोकप्रिय होते जा रहे हैं।
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आजकल इकोफ्रैंडली व एनर्जी फ्रैंडली घरों की लोकप्रियता दोबारा बढऩे लगी है। रेनवाटर, हार्वेस्ट स्ट्रक्चर, सोलर, वाटर हीटर सिस्टम व एसी खिड़कियां जिनसे अधिक से अधिक सूर्य की रोशनी अंदर आ सके। ऐसी तकनीकों पर आजकल के डिजाइनर जोर दे रहे हैं।
– नरेंद्र देवांगन

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