आलेख… योगी सरकार से प्रदेश को आस

आलेख… योगी सरकार से प्रदेश को आस

 उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद हर दिन कुछ खास हो रहा है। सरकार के स्तर पर भी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने वालों के स्तर पर भी। बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में चिप लगाकर पेट्रोल पंपों पर भारी घटतौली का मामला सामने आया है। अधिकारियों की मानें तो सालभर से घपले-घोटाले का यह खेल चल रहा था| इस खेल के तहत पेट्रोल पंप मालिक हर माह 10-15 लाख रुपये अवैध ढंग से कमा रहे थे। सालभर से अधिक समय से यह सब चलता रहा और निरीक्षण के लिए जिम्मेदार तंत्र को भनक तक नहीं लगी, यह बात जरा समझ से परे हैं। कार्रवाई के नाम पर सात पेट्रोल पंपों को सीज कर दिया गया है लेकिन उन्होंने अब तक उपभोक्ताओं के साथ जो विश्वासघात किया है। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है, उसकी भरपाई कैसे होगी? उस राशि को इन भ्रष्ट पंप वालों से कैसे वसूला जाएगा? यह देखने वाली बात होगी। इसे गनीमत ही कहा जाएगा कि एसटीएफ ने पेट्रोल पंप चोरी मामले में न केवल सात मामले दर्ज किए हैं बल्कि 23 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। जिस तरह दबिश दी जा रही है, उससे लगता है कि कुछ और लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। जाहिर है, इस मामले का खुलासा होते ही बाकी के पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हो गए होंगे और कुछ दिनों तक उपभोक्ताओं को घटतौली से राहत मिलेगी क्योंकि अभी कोई पेट्रोल पंप संचालक इस तरह की हिमाकत शायद ही करे। इस तरह के घपलों-घोटालों के होते रहने के पीछे अधिकारियों की अन्यमनयश्कता, संलिप्तता या लापरवाही ही जिम्मेदार रही है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। कुछ बिजली चोरों का भी पता चला है जो साल भर से मीटर में तकनीकी हेरफेर कर बिजली विभाग को अब तक लाखों रुपये का चूना लगा चुके हैं। मुलायम सिंह यादव के घर में भी बिजली चोरी के आरोप लग चुके हैं। रसूख के आधार पर गलत करने वालों की कमी नहीं है।
उत्तर प्रदेश में 368 न्यायिक अधिकारियों का तबादला, मुजफ्फरनगर के तीन न्यायिक अधिकारियों के भी तबादले

देश और प्रदेश में बेईमानों का प्रतिशत ज्यादा है और ईमानदारों का कम। ऐसे में परम विकसित देश, उत्तम प्रदेश की अवधारणा साकार कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल है। जिस डोली के कहार मनचले हों, वह डोली ससुराल नहीं जाती। जिस देश में सौ में 99 बेईमान हों, वह महान कैसे हो सकता है? हनुमान जी ने विभीषण से कुछ यही सवाल पूछा था कि लंका में रहते कैसे हो? और इसका जवाब विभीषण ने कुछ इस तरह दिया था। ‘सुनहुं पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन महं जीभ बिचारी।’ ईमानदार व्यक्ति बेईमानों के बीच उसी तरह रहता है, जैसे बत्तीस दांतों के बीच जीभ रहा करती है। बेईमानी मानवीय प्रवृत्ति है और ईमानदारी हर व्यक्ति की चाहत। बेईमान भी नहीं चाहता कि उसके साथ कोई बेईमानी करे। धोखाधड़ी करे। डकैत को भी यह पसंद नहीं कि कोई उसके घर डाका डाले। उससे लूटपाट करे लेकिन यह भी सच है कोई व्यक्तिगत जीवन में ईमानदार नहीं रहना चाहता। तालाब में डूबकर पानी पीने से किसी को भी पता नहीं चलता। पता तो तब चलता है जब टेंगरा गले में अटक जाए। जब तक पकड़े न जाएं तब तक तो कोई बेईमान कह नहीं सकता और पकड़ेगा कौन जब पकड़ने वाला का भी हित सध रहा हो। ईमानदार हाथों में सत्ता की कुंजी थमाने के खतरे भी हैं| इस बात को बेईमान लाॅबी बेहतर समझती है। लोकतंत्र में संख्या मायने रखती है। बेईमानों का समूह जल्दी सक्रिय होता है और ईमानदार ‘एकला चलो रे’ की रीति-नीति में यकीन रखता है। जो हम अपने लिए नहीं चाहते, वैसा ही व्यवहार औरों के साथ कैसे कर सकते हैं? एकता देखनी हो तो भेड़ों की देख सकते हैं। एक भेड़ ट्रेन से कट जाए तो दूसरी भेड़ें अपना रास्ता नहीं बदलतीं बल्कि खुद भी ट्रेन से कट जाती हैं। यह तो उनकी एकता का एक पक्ष है लेकिन उनका लड़ना भी इतना ही सहज होता है। जब भेड़ें सींग लड़ाती है तो सींग टूटने के बाद ही अलग होती हैं। इसलिए बेहतर तो यह होगा कि सिक्के के दोनों पहलुओं को देखा जाए।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने जानकारी दी है कि सभी विभागों के प्रजेंटेशन पूरे हो गए हैं। इतने कम समय में सभी विभागों का प्रजेंटेशन देख लेना किसी उपलब्धि से कम नहीं है। अधिकारियों ने अपनी ओर से निश्चित तौर पर अच्छा-अच्छा दिखाने की कोशिश की होगी लेकिन इस दौरान वे अपनी कमियों को पूरी तरह छिपा पाने में सफल हो ही गए होंगे, यह कैसे कहा जा सकता है? उन कमियों पर अधिकारियों, कर्मचारियों को दंडित किया जाएगा भी या नहीं या उन्हें ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेहु’ वाली रीति-नीति पर चलने के लिए प्रेरित कर लिया जाएगा। क्या यह मान लिया जाएगा कि व्यक्ति गलतियों का पुतला है। वह गलतियों से सीखता है। अपने में सुधार लाता है। दंड किसी भी समस्या का समाधान नहीं है लेकिन दंड न मिलने से व्यक्ति उद्दंड हो जाता है और मनमानी पर उतर जाता है। अहंकारी हो जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस युगसत्य पर विचार तो करना ही होगा। इसमें शक नहीं कि अपनी सरकार बनने के दिन से ही वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं और यह सब दिख भी रहा है। इतने कम समय में अगर अधिकारियों ने विभागीय क्रियाकलापों का प्रस्तुतीकरण कर दिया है तो इसे कमतर नहीं आंका जा सकता।
केजरीवाल ने ‘ग़लती’ मानने में देर कर दी : मनोज तिवारी जो राजनीतिक दल योगी के इन प्रयासों में सियासी नौटंकी देख रहे हैं, यही काम अगर उन्होंने अपने कार्यकाल में किया होता तो आज उत्तर प्रदेश विकास के क्षितिज पर होता। उसके सभी भूभाग में रहने वाले लोग संपन्न होते। हर हाथ में काम होता लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो इसके लिए बहुत हद तक पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियां ही जिम्मेदार रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौ दिन के अंदर सरकार के कामकाज पर श्वेतपत्र जारी करने की बात कही है। यह उनकी सदाशयता ही कही जाएगी कि उन्होंने विपक्ष को श्वेत पत्र जारी करने की मांग का मौका ही नहीं दिया और खुद श्वेतपत्र जारी करने की बात कह दी। प्रदेश की जनता को योगी का अंदाज निश्चित ही पसंद आया है लेकिन श्वेत पत्र जारी करने का यह सिलसिला हर सौ दिन बाद चलेगा या यह पहली बार ही है, यह बात भी सरकार के मुखिया के स्तर पर सुस्पष्ट की जानी चाहिए। अगर श्वेतपत्रों की निरंतरता बनी रहेगी तो इससे मंत्रियों और अधिकारियों पर काम का दबाव बना रहेगा और इससे उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश को अरसे बाद ऐसी सरकार मिली है जो आत्मानुशासन में यकीन रखती है। मुख्यमंत्री ने अपने सभी मंत्रियों को अपने-अपने विभागों का श्वेतपत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। सरकार 100 दिन की कार्ययोजना पर काम कर रही है। जिन मंत्रियों को जिला प्रभारी बनाया गया है, वे अपने जिले में जाकर सरकार के 100 दिन के एजेंडे और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जमीनी समीक्षा करेंगे। योगी आदित्यनाथ इतने भर से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों तक यह संदेश भी पहुंचवा दिया है कि वे उनसे सुबह नौ बजे से शाम छह बजे के बीच कभी भी लैंडलाइन पर बात कर सकते हैं। इससे हाजिरी बनाकर गोल हो जाने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसेगा और वे अपने कार्यालय में उपस्थित रहने को मजबूर होंगे। जब जिले के डीएम और एससपी अपने कार्यालय में होंगे तो शेष मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों पर तो दबाव बनेगा ही। इससे कार्य संस्कृति बनेगी। बिजली, सड़क, किसानों से जुड़ी समस्याओं की जांच करनेे और उसकी समीक्षा करने के लिए मंत्रियों को आदेश दिए गए हैं।
सभी मंत्रियों को दो-दो जिले आवंटित किए गए हैं। 100 दिन के बाद सरकार एक रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने रखने वाली है। न केवल अधिकारियों-कर्मचारियों के काम पर नजर रखी जा रही है। संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए कोर ग्रुप बना दिया गया है। एक मंत्री भाजपा के प्रदेश मुख्यालय पर 2 घंटे बैठकर सुनवाई करेगा। मुख्यमंत्री आवास पर जनसुनवाई पहले दिन से ही हो रही है। जिस तरह मुख्यमंत्री हर मंत्री और अधिकारी पर नजर रखे हुए हैं, कुछ वही हाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी है। यह जानते हुए भी कि योगी आदित्यनाथ बेहतर काम कर रहे हैं, प्रधानमंत्री की नजर उन पर है। विपक्ष इसे जासूसी भी कह सकता है लेकिन लोकतंत्र में बेहतर करने के लिए मानीटरिंग बहुत जरूरी होती है। प्रधानमंत्री कार्यालय से कुछ बड़े अधिकारी उत्तर प्रदेश भेजे जाने वाले हैं जो अपना काम तो करेंगे ही, योगी सरकार की कार्य पद्धति और उसके गुण-दोषों से प्रधानमंत्री कार्यालय को अवगत भी कराएंगे। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। योगी सरकार ने अधिकारियों को बदलने का काम देर से ही सही, आरंभ कर दिया है और इस बदलाव का व्यवस्था पर असर दिखने भी लगा है। सरकार को बस इतना ही सुनिश्चित करना है कि व्यवस्था और अनुशासन की डोर कमजोर और ढीली न पड़े। उत्तर प्रदेश में बेईमानी, भ्रष्टाचार और भर्रेशाही चरम पर है। इस हालात को सुधरने में समय तो लगेगा ही। केंद्र और प्रदेश सरकार जिस तरह व्यवस्था में सुधार-परिष्कार के समवेत प्रयास कर रही है, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अधिकारियों, कर्मचारियों पर भी कार्य का दबाव बढ़ा है और इस दबाव को अनवरत बनाए रखने की जरूरत है। जिस तरह मोदी सरकार ने विपक्ष के लिए विरोध का मुद्दा नहीं छोड़ा है, कुछ उसी ढर्रे पर योगी सरकार भी चल रही है। इस सिलसिले को बनाए रखना चाहिए।
-सियाराम पांडेय ‘शांत’…

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