आरके इंटर कालेज की भूमि पर कर डाला अवैध दुकानों का निर्माण

आरके इंटर कालेज की भूमि पर कर डाला अवैध दुकानों का निर्माण

शामली। नगर के आरके इंटर कालेज में प्रबंधतंत्र की मनमर्जी व हठधर्मिता के चलते स्कूल की संपत्ति पर अवैध रूप से दुकानें बनाकर स्कूल को क्षति पहुंचाने पर पूर्व राज्यपाल वीरेन्द्र वर्मा के पुत्र डा. सतेन्द्र वर्मा ने जिलाधिकारी सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आरके इंटर कालेज की संपत्ति को बचाने के साथ-साथ स्कूल की भूमि पर हो रहे दुकान निर्माण को तत्काल रुकवाने की मांग की है। स्कूल संपत्ति पर अवैध रूप से निर्मित हो रही दुकानों को लेकर नगर के समाजसेवियों ने जनसूचना अधिकार अधिनियम को अपनाकर स्कूल संपत्ति पर बन रही दुकानों के संबंध में जानकारी मांगी गयी लेकिन मठाधीश प्रबंधतंत्र के दबाब में अधिकारियों द्वारा साधी गई चुप्पी एक बडे घोटाले की ओर इशारा कर रही है जिसके चलते नगर में स्कूल संपत्ति को बचाने के लिए एक बडे आंदोलन की रूपरेखा तैयार होने लगी। उल्लेखनीय है कि शामली की शिक्षा के लिए पूर्व राज्यपाल वीरेन्द्र वर्मा ने अलख जगाई थी। पूर्व राज्यपाल वीरेन्द्र वर्मा के अथक प्रयासों के चलते नगर में आरके इंटर कालेज की भी स्थापना हुई थी। वर्तमान में आरके इंटर कालेज पर अपनी संपत्ति ठीक-ठाक है और नगर के पॉश इलाके में इंटर कालेज होने के कारण वर्तमान प्रबंध तंत्र स्कूल संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के उद्देश्य से धन अर्जित करने का एक नायाब तरीका निकाला गया जिसके चलते आरके इंटर कालेज की भूमि पर अवैध रूप से दुकानों का निर्माण शुरू कराया गया। आरके इंटर कालेज की भूमि पर हो रही दुकानों के निर्माण का खर्च कहां से हो रहा है यह सब गोलमोल है जिसके चलते आरोप है कि नगर के अनेक धनाढयों से दुकानों को लेकर मोटी धनराशि प्रबंध तंत्र द्वारा वसूली गयी है।
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स्कूल की भूमि पर बन रही दुकानों का कोई हिसाब किताब न होने व स्कूल की संपत्ति को बचाने के लिए पूर्व राज्यपाल वीरेन्द्र वर्मा के पुत्र भाजपा नेता डा. सतेन्द्र वर्मा ने जिलाधिकारी के अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आरके इंटर कालेज प्रबंधतंत्र की मूठमर्दी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गयी। आरोप है कि स्कूल प्रबंध तंत्र के साथ जनपद केशिक्षा विभाग के अधिकारी की सांठगांठ भी होने के कारण स्कूल संपत्ति पर बन रही अवैध दुकानों को लेकर कोई सजगता नहीं दिखाई दे रही और अनदेखी किए जाने पर आरके इंटर कालेज की भूमि पर प्रबंध तंत्र द्वारा तेजी के साथ दुकानों के निर्माण के कार्य को पूरा किया जाना अपने आप में संदिग्धता प्रकट कर रहा है। नगर के अनेक समाजसेवियों द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आरके इंटर कालेज की भूमि पर बन रही दुकानों की जानकारी भी मांगी गयी लेकिन दाल में काला होने के कारण समाजसेवियों द्वारा मागी गयी जानकारी को नहीं दिए जाने के चलते समाजसेवियों में प्रबंध तंत्र के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ रोष पनपने लगा है।
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दुकानों के निर्माण को लेकर स्वीकृति निदेशक माध्यमिक शिक्षा लखनऊ से प्राप्त की गयी है या नहीं, इसकी जानकारी देने की मांग की है। इसके अलावा गांव बुटराडा निवासी सचिन कुमार ने भी जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जन सूचना अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक से कालेज में दुकानों के निर्माण के संबंध में विभिन्न जानकारियां मांगी है। सचिन ने आरके इंटर कालेज शामली की अनुमोदित प्रबंध समिति द्वारा विद्यालय परिसर के भूभाग को व्यवसायिक प्रयोग में लेने हेतु किन उद्देश्यों को आधार बनाने, उद्देश्यों की पूतिर्5 हेतु प्रबंध समिति की जिस बैठक में संकल्प पारित किए गए हों, उस बैठक में पारित कार्यवृत तथा उस बैठक को आहूत करने के लिए जारी एजेंडा आदि समस्त पत्राजातों की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध कराने, आरके इंटर कालेज शामली के परिसर के भू-भागों में निर्माणाधीन दुकानों के प्रस्तावित कार्य के ठेके की तैयार हुई ऑप्शन शीट की प्रमाणित छाया प्रति उपलब्ध कराने, निर्माणाधीन दुकानों के लिए वर्तमान तक व्यय हुई राशि की मात्रा की सूचना तथा यह राशियां विद्यालय/प्रबंध समिति के किस कोष से किस अधिकार पत्र के आधार पर आहरित हुई है, इसकी सूचना देने की मांग की। गौरतलब है कि पूर्व राज्यपाल वीरेन्द्र वर्मा के पुत्र डा. सतेन्द्र वर्मा ने आरके कालेज में हो रहे दुकानों के निर्माण के संबंध में डीएम को प्रार्थना पत्र देकर कार्य को रुकवाने की मांग की थी। डा. सतेन्द्र वर्मा ने कहा था कि कालेज के प्रबंधक बाबू सिंह द्वारा दुकानें बनवाकर कालेज का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। उक्त स्थान पर तीस दुकानों का निर्माण किया जा रहा है तथा प्रत्येक दुकान के लिए छह लाख रुपये लिए जा रहे हैं जबकि उक्त राशि कालेज के किसी भी खाते में जमा नहीं की जा रही। बिना निदेशक की लिखित स्वीकृति के प्रबंधक का यह कार्य अवैध है। डा. सतेन्द्र वर्मा का कहना था कि विद्यालय की भूमि सार्वजनिक संपत्ति है जो तत्कालीन संस्थापओं द्वारा छात्रों के लिए पढाई हेतु दान की गयी थी। उक्त भूमि पर विद्यालय का भवन, क्रीडा मैदान तथा कृषि फार्म स्थित है, यह संपत्ति किसी की निजी संपत्ति नहीं है। प्रबंधक केवल ट्रस्टी के रूप में कार्य करते हैं। वे किसी भी प्रकार से विद्यालय की भूमि को अपने निजी आर्थिक लाभ के लिए खुर्द-बुर्द नहीं कर सकते। दुकानों की बिक्री से पहले नियमानुसार समाचार पत्रों में सार्वजनिक रूप से दुकानों की नीलामी के विज्ञापन प्रकाशित होने चाहिए।

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