मेरी चिट्ठी पीएम के नाम -आप तो झोला लेकर निकल जायेंगे मोदी जी… मगर….!

मेरी चिट्ठी पीएम के नाम -आप तो झोला लेकर निकल जायेंगे मोदी जी… मगर….!

modi-18आदरणीय प्रधानमंत्री जी,सबसे पहले तो आपका हार्दिक आभार कि आपने मेरे पत्र का उत्तर दिया, देश के शासक जब आम आदमी की बात सुनने लगें, तब यकीन करने का मन करता है कि शायद अब देश वास्तव में जरूर बदलेगा।मेरे एक मित्र ने मुझे मुंबई से एक शेर भेजा है-मेरे मित्र का भेजा ये शेर आज मुझे ही नहीं, देश में सभी को कुछ यकीन करने लायक लग रहा है, आपने अपनी पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों से हिसाब-किताब माँगा, वे सभी देंगे भी…!…क्योंकि आपके डंडे का डर जितना काले धन वालों को है, उतना उन सब को भी है…विपक्ष वाले कहते है कि 8 नवम्बर से पहले का भी मांगो, आपकी पार्टी के प्रवक्ता कहते है कि आप पहले 70 साल का हिसाब दो,..प्रधानमंत्री जी, देश ये सुनते-सुनते पक गया है और माफ करना .. इसलिए आज किसी नेता पर वो यकीन नहीं कर पाता है।आपने  8 नवम्बर को नोट अचानक से बंद कर दिए, पूरा देश परेशान…केवल दीदी और बहनजी ही नहीं…वे भी…जो आपके है.. लेकिन आपके डर के कारण बोल नहीं पा रहे…बहनजी कह रही हैं कि आप तानाशाह हैं, दीदी कहती कि हिटलर हैं, पर देश की जनता कह रही है कि मोदी जो कर रहे है, ठीक कर रहे है..आपने 50  दिन मांगे, देश ने दे दिए….देश लाइन में खड़ा है , 2-2 हजार के लिए परेशान हैं, कुछ अपनी जान भी गँवा  चुके हैं…मेरे मीडिया के साथी उनसे पूछ रहे है कि कोई परेशानी हो रही है..?…लेकिन वो सुबह से भूखा, लाइन में खड़ा होकर भी जवाब में चिल्ला रहा है…मोदी-मोदी ….ऐसा क्यों..?..क्योंकि …बहुत दिनों बाद उसे उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है कि शायद आप कुछ अच्छा जरूर कर दोगे…!  लोग कहते है कि मोदी तानाशाह ही सही…पर देश को आज के हालात में किसी भी कीमत पर सुधार चाहिए…अब अति हो चुकी है …सुधार हो… चाहे वो कोई भी करे…वो ईमानदार और राष्ट्रभक्त होना चाहिए.. ढाई साल में आपने कोई मौका भी नहीं दिया…इसलिए आपको तानाशाह बताने वाले आपके आलोचकों को भी लग रहा है, आप वो तो हो…बस यही विश्वास आज देश की 80  प्रतिशत आम जनता को यकीन दिला रहा है कि अब सच में अच्छे दिन आयेंगे..!
आप जब देश में परिवर्तन की बात कर रहे है, तो क्या ये जरूरी नहीं है कि सत्ता शीर्ष से ही बड़ी शुरुआत की जाए, देश में राजनीतिक दल आयकर और आर.टी.आई. की सीमा से बाहर है, क्यों…?..अगर देश से काला धन ख़त्म करना ही है, तो जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल भी अपने लिए कुछ परिवर्तन करें, मेहनत से साल भर में केवल ढाई लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले से आयकर अफसर जब चाहे सवाल-जवाब कर सकते हैं….राजनीतिक दल के नाम पर करोडो रुपये लेने वालों से कोई सवाल नहीं…?… इसीलिए आज देश में कई सौ दल बन गए है…..बहुत ऐसे दल है कि उनके पास हजारों करोड़ रुपये पहुँच गए..!.अदालत से भी पाक-साफ़ और सीबीआई से भी क्लीन चिट..?..आपसे अनुरोध है कि राजनीतिक दल को जो भी चंदा दे, उसे पूरी तरह आयकर छूट के दायरे में शामिल किया जाए, जिससे आम आदमी भी थोडा-थोडा ही सही, अपनी पसंद के दल को चंदा देगा और राजनीतिक दल भी काले धन वालों के प्रभाव से मुक्त होंगे और राजनीतिक दल भी हिसाब ऑनलाइन रखेंगे।
आप सांसदों और विधायकों से हिसाब तो मांग रहे हो..ये देंगे भी..चाहे अपने सीए से जुगाड़ ठीक करा कर दे…पर प्रधानमंत्री जी, आज राजनीति भी एक पूर्णकालिक व्यवसाय बन गयी है,आज सांसद और विधायक निधि में 10 से 30 प्रतिशत तक धनराशि कमीशन में ली जा रही है,सभी न ईमानदार है और न ही सभी बेईमान है, पर आज संख्या बेईमानों की ज्यादा है। आज सांसद-विधायक बनने का मतलब जीवन स्तर पूरी तरह बदल जाना है, आम आदमी पूरे जीवन नौकरी और व्यापार के बाद भी जीवन भर संघर्ष करता रहता है, हर छोटी सी जरुरत के लिए लोंन के प्रयास में लगा रहता है..चाहे उसे बच्चे को पढाना हो या किसी का इलाज कराना हो..आज भी वो ही नोट बदलवाने के लिए लाइन में लगा है, कोई नेता या अफसर नहीं…क्या ये जरूरी नहीं कि आज इस पर भी कुछ विचार हो,..?… जिस सांसद को लाखों रु वेतन और भत्ते के रूप में दिए जा रहे है , क्या उसके बाद भी उन्हें फ्री बिजली, सब्सिडी वाला खाना आदि दिया जाना जरूरी है..?
प्रधानमंत्री जी, पहले राजनीति समाजसेवा के लिए होती थी, पर आज मायने बदल गए है, राजनीति के तरीके बदल गए हैं। पहले की राजनीति में उस इलाके के कार्यकर्ता और समर्थक ही अपने पास से खर्च करके प्रत्याशी को चुनाव लडवाया करते थे, न प्रत्याशी का ज्यादा खर्च होता था और न उसे कमाने की ललक होती थी, पर आज चुनाव का टिकट देने की प्राथमिकता ही जाति और आर्थिक स्थिति बन गयी है..पहले तो भाजपा का चुनाव लडऩा सबसे सस्ता माना जाता था, गाँव-देहात में कहा जाता कि भाजपाई तो चने-मुरमुरे खाकर ही चुनाव लड़ा देते हैं, पर आज स्थिति बदल चुकी है। आज किसी को चुनाव लडऩा हो तो कार्यकर्ता भी एसयूवी से छोटी गाडी नहीं चाहता, शाम को थक कर खाना-पीना और खर्चा चाहता है, उस समय प्रत्याशी मजबूर भी होता है…सबकी मांग पूरी करता है..फिर हम कहते हैं कि सांसद या विधायक बनने के बाद लुटेरा हो गया ..हम ये नहीं सोचते कि हमने इसके साथ क्या किया था? ये एक बहस का मुद्दा हो सकता है कि पहले नेता बेईमानी की राह पर चला या हमने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया, तो वो भी अब अपना खर्चा निकाल रहा है।
मैं केवल नेताओं को ही दोष नहीं दे रहा हूँ, मैंने जब 17 साल की उम्र में ये अखबार शुरू किया था, तो मिशन के रूप में शुरू किया था, पर आज मिशन कहीं पीछे छूट चुका है, आज अख़बार हो या टीवी पत्रकारिता, सब पूरी तरह प्रोफेशन बन चुकी है और प्रोफेशन का एक मात्र सिद्धांत होता है लाभ ..और लाभ के लिए कई बार उसे देखकर भी अनदेखा करना पड़ता है, जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए और कभी-कभी वो गीत गाना पड़ता है जिसे मन गवारा न करे… नक्कारखाने में तूती की आवाज को कौन सुनता है, ये कहकर जमीर को समझाना पड़ता है। अख़बारों को भी हर होली-दिवाली-ईद पर नेता से विज्ञापन चाहिए और चुनाव में पैकेज..इसलिए सिस्टम के खऱाब होने में दोषी हम भी है…अब आप सुधार करना चाह रहे है, तो करे…देश चाहता है कि सिस्टम सुधरे, देश साथ… तो हम भी साथ।आपने मुरादाबाद की रैली में कहा कि मैं तो फकीर हूँ, मेरा क्या कर लोगे, मैं तो झोला उठाकर चल दूंगा…प्रधानमंत्री जी नायक फिल्म में एक अमरीश पुरी ही जनता पर बहुत भारी पड़ता था, यहां तो बहुत सारे अमरीश पुरी आपने जनता के पीछे लगवा दिए, आप तो झोला उठाकर चले जाओगे, पर इस 80 प्रतिशत आम आदमी का क्या होगा ..?..आपने मुरादाबाद में कहा कि जन-धन में जिसने पैसा जमा करवाया, उसका पैसा निकालना मत, कोई कुछ कहे तो आपको चिठ्ठी लिख दे, जनता ने तो उसी समय से इस पर अमल शुरू कर दिया, मेरे जिले में भी एक भाई ने ‘लाला जी’ की नौकरी छोड़ दी और आपके भरोसे उनका माल दबा लिया… आपने झोला उठाकर अपना पता बदल लिया तो इन सबका क्या होगा…?.. जिनके पैसे जमा हैं, वे तभी तक शरीफ हैं, जब तक आपका डर है..आपने जो डर बनाया है, अगर ये निकल गया तो जनधन खाते में जो अपना भी जमा है, वो भी उन्हें ही देना पड जायेगा। वे 8 नवम्बर की नोटबंदी की घोषणा के बाद आपको चकमा देकर अपना काला धन ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहे है, अभी आपसे नहीं डर रहे..इन गरीबो से डरेंगे ?..आप बार-बार भावुक मत होइए..जब ये लडाई शुरू की है तो इसे अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लीजिये… मेरे गुरुदेव है…. सचमुच वाले संत है..माँ गंगा की गोद में गंगोत्री जी में रहते है, जब आप गुजरात के सीएम थे, तब उन्होंने कहा था कि आप पीएम बनेंगे और देश का भला करेंगे..शायद अब वो समय आ रहा है।प्रधानमंत्री जी, मेरे एक आई.ए.एस. मित्र थे, वे मुझे सदा ईमानदारी की शिक्षा दिया करते थे, मैं भी उनका बहुत आदर करता था, एक बार एक मुख्यमंत्री ने उन्हें एक काम करने को कहा, उन्होंने साफ मना कर दिया, थोड़ी देर बाद ही उन्हें महत्वहीन पद पर स्थानांतरित कर दिया गया, उन्होंने तुरंत चार्ज छोड़ दिया और नए पद पर ज्वाइन करने चले गए, मेरे मन में उनके इस कदम से उनकी इज्जत और बढ़ गयी थी, लेकिन अभी कुछ समय पहले पता चला कि उन्होंने तो एक ही मामले में 2 हजार करोड़ साफ कर दिए, मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, यकीन नहीं हुआ, एक दिन एक शोकसभा में मिले, मैंने पूछा आप तो बड़े कलाकार निकले, उस दिन के बाद से आज तक उनसे कभी फोन पर भी बात नहीं हो पाई। ये केवल एक की बात नहीं है, आज ऐसे अफसरों की संख्या बहुत ज्यादा है, आप जहाँ छापे लगवा रहे है, वहां रोज ये ही सबूत सामने आ रहे है।प्रधानमंत्री जी हम दिल्ली जाते है, तो दिल्ली में घुसते ही सीट बेल्ट बांध लेते है और दिल्ली से निकलते ही ऐसे हटा देते है कि मानो किसी सजा में फंसे हुए थे, हम तो ऐसे है कि बिना डंडे के डर के अपनी सुरक्षा का भी ध्यान नहीं रखते…ऐसे में हमे सुधरने में समय तो लगेगा। आप कहते हैं कि पूरी तरह कैशलेस भारत बना लो..हमारा ही लाभ है..आप कह रहे है तो सही ही कह रहे होंगे..आपकी बात पर यकीन हो भी रहा है, पर सुधरते-सुधरते समय तो लगेगा..हम अगर बाजार से कोई मोबाइल खरीदने जाते है तो कम्पनी उसे 10 हजार का बता दे या 20 हजार का…हमे कोई दिक्कत नहीं, पर आप जो उस पर 15 प्रतिशत के कई तरह के टैक्स लगा देते हो,वो हमे बहुत बुरे लगते है, हमें अच्छी सड़क, बिजली, पानी सब चाहिए, उसका बिल हम देते भी हैं, पर उसे बनाने के लिए आपको टैक्स दे, हमे ‘जोर’ पड़ता है और हमारे इसी ‘जोर’ का फायदा बेचने वाले उठाते है,वे कहते है बिल से चाहिए तो 23 हजार और बिना बिल 20 हजार …हमे तो तुरंत 3 हजार का फायदा दिखता है और हम ले लेते हैं..मेरा अनुरोध है कि ये व्यवस्था करा दो कि  कोई भी सामान जहाँ बने, वहीँ उसमे जो भी टैक्स आप चाहो जुडवा दो, सारे डीलरों, दुकानदारों के मुनाफे जुडवा दो, गंगा मैया की सफाई हो या देश की सफाई, सबके खर्चे भी जुड़वा दो, फिर 20 हजार का माल चाहे 24 में मिले, पर उसकी वो कीमत हो सभी टैक्स सहित, तो हमे कोई दिक्कत नहीं होगी..जब अलग से टैक्स के नाम पर कुछ नहीं देना होगा,तो चाहे हम सुई भी खऱीदे, उसका भी बिल जरूर लेंगे, फिर आप न भी कहना, तो भी कार्ड से ही पेमेंट करेंगे, आपकी मुहिम आसान हो जाएगी। कार खरीदते समय ही पूरा टोल भी कीमत में ही वसूल लो..रोज-रोज की टोल की चिक-चिक से भी मुक्त करा दो। 
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प्रधानमंत्री जी, आपने जनधन वाले गरीबो का तो जुगाड़ कर दिया पर आपके असली वोटर जो मध्यमवर्ग और छोटे व्यापारी है, उनके बारे में भी जरूर सोच लीजिये, आजकल उनमे दहशत है कि बैक में जमा के नाम पर सबके पास नोटिस आयेंगे और आपके अफसर उनका इलाज कर देंगे, आपने महिलाओं के जो ‘गुप्त खजाने’ खुलवा दिए है, उन्होंने बहुत सारे मध्यमवर्ग के बहीखाते बिगाड़ दिए है, जिसके पति की जैसी कमाई, उसकी पत्नी का वैसा खजाना…आपसे अनुरोध है कि केवल ढाई लाख की सीमा पूरी होते ही आपके अफसर कुल्हाड़ा न चलाये…हर शहर में सबको पता होता है कि काला धन किस-किस के पास है…उस पर सख्त कार्यवाही हो, पर उसकी आड़ में किसी मध्यम व्यापारी या प्रोफेशनल का उत्पीडन न हो..देश की जनता सरकारी बाबुओं से ज्यादा ईमानदार और देश भक्त है..बाबुओं के हाथों उन्हें कुरबानी का बकरा न बनवा दीजियेगा..आपके वित्त मंत्री जेटली जी, जब विपक्ष में थे तो कहते थे कि 5 लाख तक आयकर सीमा बढाओ,जब से सरकार में आये,तब से शायद उन्हें कुछ भूलने की बीमारी हो गयी, उन्हें भी याद दिला दीजिये, इस बार आप 30 दिसंबर के बाद जब  मन की बात करें तो ऐसी ही कोई अच्छी सी घोषणा कर दीजिये….बुजुर्ग बताते है कि अंग्रेजों ने जब हमें चाय पीनी सिखाई थी तो कुछ पैसे देते थे,बाद में आदत पड़ गयी तो अब 10-20 रुपये की भी चाय पी लेते है,..हम तो सर्फ के साथ एक कटोरी फ्री मिलने पर, सर्फ के 3-4 पैकेट खरीदकर, खुश होने वाले आम लोग है,छोटी-छोटी ख़ुशी की तलाश करते है..आप चाहते है कि देश जल्द से जल्द कैशलेस हो.,,तो सभी कार्डों से लेन- देन से सभी टैक्स हटा दीजिये, आप कार्ड से खरीद करने पर 1-2 प्रतिशत की छूट भी दे दे .जो हम तो कार्ड के बिना किसी को एक रुपये भी न दे… जय हिन्द…
-अनिल रॉयल
सम्पादक  
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