आपकी सेहत और टेक्नोलॉजी का दुष्प्रभाव…!

आपकी सेहत और टेक्नोलॉजी का दुष्प्रभाव…!

क्या आप दिन भर अपना काफी समय और यहां तक कि खाली समय भी लैपटॉप पर काम करते हुए बिताते हैं? डॉक्टरों ने लैपटॉप के लंबे समय तक और रोजमर्रा जीवन में सीमा से अधिक प्रयोग करने पर इसके घातक परिणाम सामने आने की चेतावनी दी है।इतना गर्म कि संभालना मुश्किल
ऐसा माना जाता है कि कम आवृत्ति वाला चुंबकीय क्षेत्र जैसे कि परंपरागत (नॉन फ्लैट स्क्रीन) कंप्यूटर मॉनीटर और लैपटॉप के बायोलॉजिकल प्रभाव होते हैं जो विकसित होते ऊतकों को प्रभावित करते हैं। साथ ही इससे जन्मदोष, कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।इसके अलावा, यह न्यूरोलॉजिकल फंक्शन में भी बदलाव कर देता है। हालांकि इसकी कोई प्रामाणिकता नहीं है कि कम आवृत्ति वाले चुंबकीय क्षेत्र के विकिरण की वजह से कैंसर होता हो। कुछ वैज्ञानिकों को संदेह है कि यह टी-लिंफोसाइट (तंत्रिका तंत्र की रोगों से लडऩे वाली कोशिकाएं) को सही करने की क्षमता को बिगाड़ देता है, जो कैंसर से लडऩे में सहायक होती है।
सुधारें कैसे : स्क्रीन से एक बांह की दूरी रखें (30 इंच या 75 से.मी.)। ऐसे में अगर आपको मॉनिटर देखने में दिक्कत आती है, तो टेक्स्ट साइज बढ़ाएं। इसके अलावा मॉनिटर के किनारों और पीछे से चार फीट की दूरी रखें जिससे विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रभाव ज्यादा नहीं पड़ेगा।सावधानी : अगर आप गर्भवती हैं या आपको गर्भ ठहरने की संभावना है तो कुछ सावधानियां बरतें। कंप्यूटर पर कम समय व्यतीत करें और जहां तक संभव हो लैपटॉप को अपनी गोद में न रखें।चेतावनी समझें : लैपटॉप में काम करने के दौरान आपके हाथों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। ज्यादा टाइभपग करने की वजह से मीडिएन नर्व में रेपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी (आरएसआई) हो जाती है जिससे ‘कॉरपल टनल भसड्रोम’ हो सकता है। डाक्टरों के अनुसार इसकी वजह से अंगुलियों में दर्द और कंपन होता है। इससे अंगुलियों में सुन्न, दर्द, हाथ की मजबूती में कमी, किसी वस्तु को पकडऩे में दिक्कत और कई अन्य मोटर स्किल (जैसे लेखन) करने में परेशानी होती है।सुधारें कैसे : जब आप टाइप कर रहे हों तो आपके हाथों की स्थिति ठीक होनी चाहिए। कोहनी एक सीध में होनी चाहिए। कलाई किनारे की तरफ नहीं मुडऩी चाहिए। अपने कंधों और हाथों को गर्म रखें।देखने में परेशानी
ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने से कंप्यूटर विजन भसड्रोम हो सकता है। इसमें आंखों में जलन, खुजली, थकान, लालपन, पानी आना और रंगों में फर्क न कर पाने जैसी समस्याएं आती हैं। जब हम लगातार मॉनीटर देखते हैं तो लोग पलक कम झपकाते हैं जिसकी वजह से आंखें सूखने लगती हैं।इसके अलावा, स्क्रीन की चमक, खराब स्थिति और अनियमित प्रकाश वाले स्थान पर काम करने से आखों में तनाव होता है, जिससे सिरदर्द होता है। 
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सुधारें कैसे : कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से बचाव के लिए आपको 20-20 का नियम अपनाना चाहिए। प्रत्येक 20 मिनट में, 20 सेकेंड का ब्रेक लेकर अपने से 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखें। इसके अलावा, ब्रेक के दौरान अपनी पलकों को झपकाते भी रहें। आप आर्टिफिशियल टियर्स या किसी लुब्रिकेंट आईड्रॉप का प्रयोग भी कर सकते हैं। स्क्रीन का एंगल आपके लाइन ऑफ विजन से 90 डिग्री का होना चाहिए। लैपटॉप को किताबों के ऊपर या लैपटॉप स्टैंड पर रखना चाहिए।
गले में दर्द : लैपटॉप पर देर तक काम करने से गले में अकडऩ और दर्द होता है। गलत मुद्रा की वजह से गले में दर्द जैसी दिक्कतें आती है। ज्यादातर कोहनी हवा में रहती है, जिससे कंधे और गले की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं जिस कारण सॢवकल स्पोंडलाइटिस की परेशानी भी हो सकती है। कई लोग भारी लैपटॉप बैग गलत तरीके से टांगते हैं। इससे गर्दन, कंधे और लोअर, अपर बैक की मांसपेशियों में दर्द होता है।सुधारें कैसे : आप दिन में कुछ समय कंधे को पीछे और आगे की तरफ घुमाने की एक्सरसाइज कर सकते हैं। अपने सिर को एक से दूसरी ओर घुमाएं। कुछ देर आकाश की तरफ देखें और उसके बाद रिलैक्स हों।भावनात्मक : रोज-रोज होने वाला सिरदर्द, तेज हृदयगति, सोने में दिक्कत, गुस्सा, लगातार तनाव रहना, आलस्य और परेशानी कई लोगों को होती है। जो लोग कंप्यूटर या इंटरनेट का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं उन में बातचीत कम होती है जिसकी वजह से डिप्रेशन की संभावना काफी बढ़ जाती है। अकसर कंप्यूटर पर देर तक काम करते रहने से लोगों को कंप्यूटर से भावनात्मक रूप से लगाव हो जाता है।
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ऐसे में जब लोग कंप्यूटर पर काम नहीं कर पाते तो वह भावनात्मक तौर पर निराश हो जाते हैं और उन्हें गुस्सा ज्यादा आता है।सुधारें कैसे : यह बात पूरी तरह बताएं कि आप मास्टर हैं। कंप्यूटर के दास बनने की जरूरत नहीं है। कंप्यूटर पर सीमित समय व्यतीत करें।हाई-परफॉरमेंस लैपटॉप आरामदायक होते हैं। वह औसत डेस्कटॉप कंप्यूटर की तुलना में ज्यादा ऊष्मा पैदा करते हैं। न्यूयॉर्क की स्टेट यूनिवर्सटी के शोधकर्ता समूह द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि जो पुरुष गोद में रखकर लैपटॉप का प्रयोग करते हैं, उनके अंडकोश का तापमान 2.6 से 2.8 डिग्री बढ़ जाता है। तापमान बढऩे से स्पर्मस बनने की संख्या में कमी आती है। शोध जारी है कि गोद पर लैपटॉप रखकर काम करने से और बांझपन में क्या सबंध है।ध्यान दें : ये हकीकत है कि लैपटॉप कंप्यूटर को गोद में इस्तेमाल करने के लिहाज से बनाया गया है, लेकिन वास्तविकता ये भी है कि गोद में लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करना भी सुरक्षित नहीं। आप लैपटॉप को किसी ऐसी जगह पर प्रयोग करें जैसे कि आप डेस्कटॉप का करते हैं।कंप्यूटर का इस्तेमाल
कंप्यूटर इस्तेमाल से आंखों के नीचे काले घेरे, सिरदर्द, आंखों में थकान जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में अब यह भी संभव नहीं कि कंप्यूटर पर काम करना बंद कर दिया जाए या कम कर दिया जाए। कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग कुछ घंटों बाद ऐसा शारीरिक और देखने में दिक्कत होने जैसी समस्याएं महसूस करते हैं।
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शोध यह दर्शाते हैं कि कंप्यूटर को दो घंटे से ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोगों को आंख की मांसपेशियों में तनाव की शिकायत होने लगती है। इसकी वजह से सिरदर्द, आंखों में जलन, धुंधला दिखना, फोकस न कर पाना, गले और गर्दन का दर्द जैसी समस्याएं भी होती है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते इसका उपचार कर लिया जाए, ताकि बाद में आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कार्यस्थल की जगह में इस बात को जांच लें कि जहां आप बैठते हैं, वहां रोशनी समुचित मात्र में आती हो। साथ ही इस बात पर भी गौर करें कि आपकी कुर्सी की ऊंचाई सही हो। कंप्यूटर की स्क्रीन की ब्राइटनेस को कंप्यूटर के अनुरूप रखें। बैकग्राउंट और ऑन स्क्रीन कैरेक्टर के बीच का कंट्रास्ट ज्यादा रखें। फुल टाइम कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों को प्रत्येक घंटे में दस मिनट का ब्रेक लेना चाहिए।
*चमक को कम रखें। विंडो शेड का इस्तेमाल करें।* कंप्यूटर में एंटीग्लेयर स्क्रीन लगवा लें।*जल्दी-जल्दी पलकें झपकाएं। पलकों को बार-बार नहीं झपकाने से आंखों का पानी सूख जाता है।
* अपनी आंखों का नियमित अंतराल पर चेकअप कराएं।
* प्रत्येक दस से पंद्रह मिनट में अपना ध्यान कंप्यूटर स्क्रीन से हटा कर किसी दूसरी चीज पर ध्यान लगाएं।
* पर्याप्त नींद लें। कम नींद लेने से आंखों का तनाव बढ़ता है।

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