आपका व्यवहार ही आपका असली शत्रु तो नहीं?

आपका व्यवहार ही आपका असली शत्रु तो नहीं?

 इस संसार में कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें हमेशा शिकायत ही रहती है। अगर वे दिन भर किसी दूसरे कार्य में व्यस्त रह गये और भोजन का मौका नहीं मिला तो झट आरोप मढ़ देंगे कि आज उसे किसी ने भोजन के लिए पूछा ही नहीं। अगर उन्हें अपने कार्य में विशेष सफलता नहीं मिल रही है तो वे बस एक वाक्य का आरोप जड़ देंगे कि उनका तो कोई ध्यान ही नहीं रखता। वे दूसरों को फोन करें या न करें, उन्हें हमेशा उम्मीद होती है कि लोग उनका हाल-चाल पूछते रहें। कुछ लोग तो आदतन ऐसा करते हैं, कुछ लोग सामने वाले को डोमिनेट करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कुल मिलाकर इनका व्यवहार असहनीय हो जाता है। लोग इनसे कटते जाते हैं। इनके मित्रों व विश्वसनीय लोगों की संख्या घटती जाती है। इनकी स्थिति एकांगी हो जाती है। हद तो तब हो जाती है जब ऐसे लोग इतना हो जाने के बाद भी अपने भीतर झांकने की जरूरत नहीं समझते। जरूरत इस बात की है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले खुद को गहराई से जानने की कोशिश करें। ऐसे व्यक्ति पहले अपनी आदतों में सुधार लायें। उन्हें यह प्रण करना होगा कि किसी कीमत पर वे दूसरे के ऊपर आरोप नहीं लगायेंगे। संभव हो तो प्राणायाम का सहारा लें। योग की शरण में जाएं।
कभी कभी झूठ बोलना चाहिए..ऐसा झूठ जो रिश्तों को पास ले आये..!
कुछ दिन के कठिन अभ्यास के बाद स्थिति में रचनात्मक बदलाव दिखेगा। सगे-संबंधी,मित्र-परिचित उसे ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें। जीवन में सहयोग का भी आनंद प्राप्त होगा।
परीक्षा में सफलता के लिए शुरू से अध्ययन जरूरी..!
हां,अगर कुछ लोग आपको डोमिनेट करने के लिए ऐसा व्यवहार करते हैं तो उनसे जितना जल्दी हो सके, पिंड छुड़ा लीजिए क्योंकि जो खुद का दुश्मन हो, वो किसी का मित्र कैसे हो सकता है?
– सूरज पाठक

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