आधुनिक जीवन की देन है थकान

आधुनिक जीवन की देन है थकान

tiredआज की भागदौड़ वाली जिन्दगी में थकान अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बनाती जा रही है। बड़े शहरों में आगे बढऩे की होड़ में कोई शारीरिक रूप से थका है तो कोई मानसिक रूप से। वैसे थकान एक प्राकृतिक प्रक्रि या है परन्तु हर समय थका हुआ महसूस करना प्राकृतिक न होकर अप्राकृतिक हो जाता है।
कामकाजी महिलाएं तो आवश्यकता से अधिक थक जाती हैं क्योंकि उन्हें दो चक्कियों में पिसना पड़ता है। थकान होने पर मन काम में नहीं लगता, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, चेहरे से सदा थका थका महसूस होता है, सिर और शरीर के जोड़ों में दर्द का रहना थकान को दर्शाता है। लगातार थकान से जीवन के प्रति अरूचि बढ़ जाती है और उत्साह कम हो जाता है।
थकान शारीरिक व मानसिक मुख्यत: दो प्रकार की होती है। शारीरिक थकान तो शरीर की आवश्यकता से अधिक श्रम कर लेने से होती है। कुछ समय आराम कर लेने से शरीर पुन: चुस्ती से भर जाता है तो ऐसी थकान अधिक चिन्ता का विषय नहीं होती।
कई बार शारीरिक परेशानियां भी थकान का मुख्य कारण होती हैं जैसे रक्त की कमी, मोटापा, नींद पूरा न होना, शोर शराबा, मधुमेह, थायराइड की समस्या आदि से भी शरीर सुस्त रहता है और थका थका रहता है। लगातार शरीर की थकान, महसूस करने पर डॉक्टरी जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए।
जो लोग दिमागी काम अधिक करते हैं और शारीरिक श्रम बहुत कम, ऐसे लोग मानसिक थकान के शिकार होते हैं। ऐसे लोग हमेशा थके-थके लगते हैं और चिंताओं से ग्रस्त रहते हैं। कभी कभी कोई अप्रिय घटना भी मानसिक थकान का कारण हो सकती है। मानसिक रूप से लगातार थकान रहने पर डाक्टर से तुरन्त मिलकर राय लें।
कई बार अधिक मानसिक दबाव और थकान मानसिक विकार में बदल जाती है। ऐसे लोग मानसिक थकान को दूर करने हेतु अधिक चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान का सेवन अधिक करने लगते हैं जो मन के साथ साथ शरीर के लिए भी नुक्सानदेह हो सकता है।
दोनों तरह की थकान से बचने हेतु अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव लाना अति आवश्यक होता है। ऐसे में कुछ प्रयास आपकी मदद कर सकते हैं।
– शरीर को स्वस्थ रखने हेतु उचित संतुलित आहार लेना अति आवश्यक होता है। प्रतिदिन के आहार में विटामिन, प्रोटीन, वसा, मिनरल्स व कार्बोहाइड्रेट का होना अवश्यक होता है। इन सब चीजों की प्राप्ति हेतु प्रतिदिन दूध, दही, हरी ताजी सब्जियां, फल, सूखे मेवे, अंकुरित भोजन का सेवन करें। शरीर को पूरा आराम देने के लिए भरपूर शांत नींद लें। पूरी नींद लेने से भी दोनों प्रकार की थकान से बचा जा सकता है।
-शरीर की सफाई पर पूरा ध्यान दें। मौसम अनुसार स्नान लेने से भी हम अपनी थकान दूर कर सकते हैं। प्रतिदिन स्नान और शरीर की सफाई रखने से मन और तन दोनों प्रफुल्ल रहते हैं।
– नियमित व्यायाम करने से भी शरीर में स्फूर्ति का समावेश होता है। व्यायाम शरीर को पर्याप्त रूप से आक्सीजन देता है। ताजा वातावरण शरीर में ताजगी भर देता है।
– तनाव और चिन्ता मानसिक थकान के सबसे बड़े कारण हैं। इन्हें खत्म तो नहीं किया जा सकता परन्तु कम तो किया जा सकता है। प्रयास करें तनावमुक्त रहने का।
तनावमुक्त रहने पर आप थकान को कोसों दूर फेंक सकते हैं। किसी से अधिक उम्मीद न रखें, प्रसन्न रहें और सामने वाले को भी प्रसन्न रखने का प्रयास करें।
– दिन के कामों में थोड़ा समय विश्राम के लिए अवश्य रखें । थोड़ा सा विश्राम आपको स्फूर्ति प्रदान करेगा।
– कुछ कीमती समय अपनी रुचियों को पूरा करने के लिए निकालें। शौक के बिना जीवन बहुत अर्थहीन सा लगता है। अच्छा साहित्य पढ़ें, डायरी लिखें, अच्छे टी.वी. प्रोग्राम देखें, घर की साज सज्जा पर ध्यान दें, पेन्टिंग, बागवानी और अच्छे म्यूजिक का आनन्द लें।
– नशीले पदार्थ, धूम्रपान व चाय काफी का सेवन कुछ समय के लिए शरीर और मन को चुस्त बनाते हैं। इन वस्तुओं के आदी होने पर शरीर और मन की चुस्ती शिथिल पड़ती है, इसलिए इन पदार्थों के सेवन से स्वयं को बचा कर रखें।
– फॉस्ट फूड, डिब्बाबंद पदार्थ, शीतल पेय शरीर की क्षमता को कम करते हैं। इनका सेवन कम से कम करें।
– शरीर को स्थूल न होने दें। स्थूलता भी थकान को बुलावा देती है। छोटे छोटे काम स्वयं चुस्ती से करें, दूसरों पर निर्भर न बनें।
-नीतू गुप्ता

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