आतिशबाजी का लुत्फ उठाएं पर जरा संभल के…बरते ये सावधानियां …!

आतिशबाजी का लुत्फ उठाएं पर जरा संभल के…बरते ये सावधानियां …!

crackers_1476456683दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बच्चों, युवाओं एवं बड़े बुजुर्गों में उत्साह की लहरें हिलोरे खानी शुरू कर देती हैं। इस प्रकाश पर्व का पटाखों, आतिशबाजी एवं धूमधड़ाकों के साथ गहरा सम्बन्ध अनादिकाल से रहा है। इसके बगैर तो यह त्योहार भी कुछ सूना-सूना लगने लगता है या यों कहा जा सकता है कि दीपावली के त्योहार का आतिशबाजी के साथ चोली-दामन वाला साथ सदा से रहा है।
आइए, हम आतिशबाजी करते वक्त इन बातों पर गौर करें, ताकि इस खुशी के अवसर पर होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सके और इस खुशी के पर्व को गमगीन होने से भी रोका जा सके।
– सर्वप्रथम आतिशबाजी के लिए उपयुक्त स्थान चुनें जहां पर कोई घास-फूस व चारा न हो और आजू-बाजू में कोई मकान न हो। राकेट आदि छोडऩे से पहले उस स्थान का भली-भांति निरीक्षण करें कि आगे-पीछे, दूर तक स्थान खुला है अथवा नहीं। यदि स्थान खुला न हो तो वहां पर राकेट न छोड़ें नहीं तो किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।
किस मुहुर्त में करे दीपावली पूजन, जो खुश होकर कृपा बरसायें महालक्ष्मी-कुबेर….!
– जब भी आप पटाखे चलाएं तो यह ध्यान रखें कि जब तक पटाखा छूट न जाए, तब तक उसके पास न जाना ही उचित रहता है। अक्सर देखने में आता है कि हम पटाखे की बत्ती (वाट) जलाकर दूर तो भाग जाते हैं मगर जब पटाखा नहीं फूटता तो हम बिना सोचे-समझे उसे तुरन्त-फुरन्त उठा लेते हैं। ऐसा करना कभी-कभी जोखिम भरा हो सकता है। वह पटाखा हाथ में ही छूट सकता है और हाथ को भी जला सकता है। वह पटाखा हमारे हाथ में आंखों के सामने हो तो हमारी नेत्र ज्योति के लिए काफी घातक साबित हो सकता है।
भारतीय संस्कृति में दीपावली..जो दीप जलाता है,वह अश्वमेध यज्ञ करने का फल करता है प्राप्त..!
– विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि आजकल बम पटाखे बनाने वाली फैक्टरियों में पटाखों में जो बारूद इस्तेमाल किया जाता है, उसमें अन्य रसायनिक पदार्थ भी मिले होते हैं जो हमारी आंखों एवं त्वचा पर प्रतिकूल असर करते हैं।जब बच्चे पटाखे छोड़ें तो बड़ों को उनके पास रहना चाहिए। साथ ही बच्चों को छोडऩे के लिए हल्के पटाखे देने चाहिए। प्राय: बच्चे अनार छोड़ते समय उस पर मुंह झुका कर बत्ती जलाते हैं, जिससे मुंह झुलस सकता है, अत: अनार की बत्ती लगाते समय अपना मुंह दूर रखें और बत्ती को जलाने के लिए अगरबत्ती को प्रयोग में लाएं।
विदेशों में भी मनाई जाती है दीपावली ….अलग-अलग देश में दीपावली मनाने के रोचक है अंदाज
– यथासंभव कम आवाज वाले पटाखों का ही उपयोग करें क्योंकि तेज आवाज के पटाखों से हमारे कानों के पर्दो पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। बच्चों एवं वृद्धों पर तो यह कहीं ज्यादा दुष्प्रभाव डाल सकता है। इसके परिणाम स्वरूप बहरेपन, अनिद्रा, याददाश्त में कमी, चिड़चिड़ापन आदि शारीरिक व मानसिक व्याधियां उत्पन्न होने की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं।– जब आप आतिशबाजी करें तो इस बात का ध्यान सदैव अपने जहन में रखे कि आपकी इस खुशी एवं मजे से बीमार व्यक्तियों व वृद्धों को कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है।
– आतिशबाजी करते समय ढीले व लहराते कपड़े नहीं पहनने चाहिए। ये कपड़े जल्दी आग पकड़ लेते हैं। आतिशबाजी के समय सूती कपड़े पहनने चाहिए। सूती कपड़े आग भी नहीं पकड़ते और आतिशबाजी के दौरान हमारे लिए
सुरक्षा कवच की भूमिका का निर्वाह करते हैं।
– आतिशबाजी करने के लिए आपने जिस स्थान का चुनाव किया है, वहां पर आप आतिशबाजी से पूर्व ठंडे पानी की बाल्टी एवं प्राथमिक उपचार का सन्दूक रख दें। सन्दूक में कुछ एंटीसेप्टिक क्र ीम भी रखना लाभप्रद होता है। अगर असावधानी से त्वचा झुलस भी जाए तो उस पर ठंडा पानी डालकर फफोलों को न फोड़ कर उस पर एंटीसेप्टिक क्र ीम लगाकर प्राथमिक उपचार शीघ्र किया जा सके और उसके पश्चात् मरीज को अस्पताल ले जाएं।
– आतिशबाजी के कारण पर्यावरण प्रदूषण में एकाएक वृद्वि हो जाती है। आतिशबाजी के परिणामस्वरूप ध्वनि प्रदूषण तथा वायु प्रदूषण में भी इजाफा होता है। इस बात को भी दृष्टिगत रखा जाए।
– मनोरंजन के लिए आतिशबाजी का लुत्फ अवश्य उठाएं लेकिन इन सारी बातों पर अमल भी करना अत्यावश्यक है। दरअसल ऐसा करने से हम दीपावली के ज्योतिर्मय पर्व की तो शोभा बरकरार रखेंगे ही, इसके अलावा हम हमारी प्रकृति व पर्यावरण की सुन्दरता को सुरक्षित रख सकेंगे। यही नहीं, हम अपने स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रख कर दीपावली का सही मायनों में आनन्द ले पाएंगे।
– आतिशबाजी सीमित करने से एक तो हम अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे, वहीं दूसरी ओर रूपयों-पैसों के व्यर्थ के व्यय से भी बच जाएंगे।
– इस प्रकार दीपावली का पर्व हमारे लिए सचमुच में सुखद एवं यादगार पर्व साबित हो सकेगा।
– गणपत लाल पंवारआप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
royal bulletin
टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइट
www.royalbulletin.com
और अंग्रेजी news वेबसाइटwww.royalbulletin.in को भी लाइक करे..

Share it
Share it
Share it
Top