आज भी स्वीकृति आसान नहीं करियर वुमन की..!

आज भी स्वीकृति आसान नहीं करियर वुमन की..!

पांच छ: दशक पहले महिलाओं का घर से निकलना कल्पना से परे था। पिछले एक डेढ़ दशक से महिलाएं जागरूक होने लगी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपना करियर बनाने लगी हैं। वक्त के साथ महिलाओं की सोच में बहुत विकास हुआ। उन्होंने घर तथा बाहर दोनों मैदानों को अच्छे से संभालने का पूरा प्रयास किया और कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त की। अब महिलाएं सफलता की सीढ़ी पर साल प्रतिसाल आगे बढ़ रही हैं।
अभी भी समाज में कुछ लोगों की सोच ऐसी है जो महिलाओं का घर की चारदीवारी से बाहर निकलना अच्छा नहीं समझते। उनके विचार में महिलाओं को शादी ब्याह कर बस घर परिवार के बारे में ही सोचना चाहिए। उनके लिए इसके अतिरिक्त महिलाओं का दूसरा काम नहीं है। आइए जानें कौन हैं जो उनके करियर पर नजर गढ़ायें रहते हैं:-
– मोहल्ले की कुछ महिलाएं जिन्हें दूसरों की बहू- बेटियों के बारे में जानने की उत्सुकता बनी रहती है। वे पूरा ध्यान रखती हैं कि फलां बहू बेटी नौकरी पर क्यों जाती है, घर को सुचारू रूप से नहीं चला पाती। उनकी सास को कहती हैं – काम पर जाएगी तो घर की परवाह कैसे करेंगी। तुम्हें तो नौकरानी बना कर रखा है। अगर बेटी है और करियर में आगे बढ़ रही है तो उसकी शादी ब्याह की चिंता उन्हें सताती है। उनके मां बाप को शादी के लिए दबाव डालने से भी ऐसी महिलाएं पीछे नहीं रहतीं।
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– आफिस में साथ काम करने वाले पुरूष सहकर्मी यह कहते नहीं थकते कि पुरूष बॉस या ग्रुप लीडर श्रेष्ठ होते हैं, महिलाओं के बजाय। अगर उनकी ग्रुप लीडर या बॉस महिला है तो मीठे मीठे उलाहने देते रहते हैं।
– आफिस में पुरूष बॉस लेट नाइट तक महिलाओं के न रूकने से परेशान रहते हैं। बात बात में कहते हैं यदि तुम्हारे स्थान पर पुरूष होता तो उसे रोक कर मैं काम पूरा करवा लेता। महिलाओं को महिला होने का अहसास करवाते रहते हैं।
– ऐसे रिश्तेदार जो हमदर्दी जताते हुए कहते हैं वर्किंग बेटी के बारे में कि इसकी शादी क्यों नहीं कर रहे। क्या शादी इसलिए नहीं हो रही क्योंकि यह पुरूषों के साथ नौकरी करती है। हद तो तब होती है जब कुंआरी वर्किंग बेटी के चरित्र पर लांछन लगाना शुरू करते हैं और इतना तक कह डालते हैं शादी इसलिए नहीं कर
रही कि इसकी मौज मस्ती में खलल पड़ेगा।
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– ऐसे पुरूष सहकर्मियों की भी कमी नहीं है जो चाहते हैं अगर आफिस में लड़कियां हैं तो उनके साथ मौज मस्ती ही करनी चाहिए। वे बीच बीच में व्यंग्य कसते रहते हैं कि क्या सारा दिन काम ही करोगी। थोड़ी मौज मस्ती भी जरूरी है। ऐसे पुरूष सहकर्मी बस टाइम पास करने वाले होते हैं।
– बड़ी कंपनी में अगर महिला उच्च पद पर आसीन है तो बहुत से क्लांइट भी महिला की कार्यक्षमता पर शक करते हैं। कोई आफिस की बड़ी डील होनी हो तो महिला के स्थान पर पुरूष को आगे करते हैं। उन्हें संशय रहता है कि महिला इतनी बड़ी डील को हैंडल कैसे कर पाएगी।
– बहुत से सास ससुर भी ऐसे हैं जो बहू तो खूब पढ़ी लिखी चाहते हैं पर उनको उनका नौकरी करना गवारा नहीं होता। उनके लिए बहू को घर लाने का अर्थ है कि वे जिम्मेदारियों से मुक्त हो कर सारा पारिवारिक बोझ बहू पर डालें। उन्हें बहुओं का करियर में आगे बढऩा बिलकुल नहीं भाता।
– नीतू गुप्ता

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