आइये, जरा मुस्कुरायें

आइये, जरा मुस्कुरायें

foodदु:ख-पीड़ा-वेदना, मानसिक तनाव, घुटन और कुण्ठा से भरी जि़दगी को खुशहाल बनाने का आसान तरीका है मुस्कान। हंसने, खिलखिलाने और मुस्कुराने से न केवल मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है बल्कि इससे शरीर के अनेकानेक रोग भी दूर होते हैं। हंसता हुआ चेहरा अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
हंसना-खिलखिलाना आदमी तभी शुरू कर देता है जब वह पैदा होता है। बालक की भोली हंसी से भला कौन प्रमुदित नहीं होता? चाहे कोई चुटकुला हो, चाहे व्यंग्य-तरंग अथवा हास्य-प्रहसन, आदमी को हंसाये बिना नहीं रहते किंतु आजकल आदमी की जि़ंदगी दिन-पर-दिन बोझिल और निराशा से घिरती जा रही है।
सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक हेक ड्यूक अपनी पुस्तक ‘माइंड एण्ड हेल्थ’ में लिखते हैं कि मन: स्थिति में निराशा-हताशा जैसे भाव छाये रहने से नाड़ी मंडल, अंत:स्रावी हार्मोन ग्रंथियों एवं मांसपेशियों पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है जो अनिद्रा, अपच, उच्च रक्तचाप, हिस्टीरिया, कैंसर, कोलाइटिस, हृदय रोग जैसे भयानक रोगों का कारण बनता है।
हाल ही में ‘अटलांटा’ में हुए शोध से यह बात और सामने आई है कि सदैव प्रसन्नचित रहने वाला व्यक्ति ‘डिप्रेशन’ जैसे हालात से बचा रहता है साथ ही उसमें रोग प्रतिरोधी क्षमता का भी विकास होता है।
लोगों को तनावमुक्त रखने में ‘हंसी’ की अहम् भूमिका है इसलिए प्रतिदिन कम से कम दस मिनट हंसना चाहिए। ऐसे अवसर दिन में कई बार आते हैं जब आपके चेहरे पर हंसी खेल जाती है। हंसी का मौका हो तो जी भर कर ठहाका लगाना चाहिए। हंसना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। हंसने-खिलखिलाने वाला स्वयं तो फायदे में रहता ही है, अपने सम्पर्क में आने वाले का जी हल्का करके हंसी रूपी संजीवनी बांटकर उसको अपना दोस्त बना लेता है। जिसके चेहरे पर मुस्कान होती है उसके सफल होने का आभास मिलता
है।
सचमुच जिसने निराशा पर जीत हासिल कर ली है, वही तो दिल खोलकर हंस सकता है। हंसने वाला मानो दु:ख-आपत्तियों को अपनी हंसी के हथियार से मारकर नष्ट कर देता है। इसके विपरीत खिन्न और उदास व्यक्ति के पास लोग बैठना तक पसंद नहीं करते भले ही वह कितना बड़ा असामी हो जबकि फक्कड़ मस्त साधारण आदमी भी अपनी मुस्कान से हजारों लोगों के दिल में जगह बना लेते हैं।
मुस्कान-प्रसन्नता की, आंतरिक उल्लास की प्रतिक्रि या है। यह अमृत संजीवनी है जो निराशा के महाभयंकर रोग से मुक्त करती है। जो मुसीबत में भी मुस्कुराता है, उसे ईश्वर की भी मदद मिलती है।
हंसने-मुस्कराने में जो लोग कोताही या कंजूसी करते हैं उन्हें अभागा ही समझना चाहिए। जि़दगी हंसने-हंसाने का नाम है। आइये, जरा हंसें-मुस्कुरायें।
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