अस्वीकृति को सहजता से लें

अस्वीकृति को सहजता से लें

अस्वीकृति को कुछ लोग सीधे अपने आत्म सम्मान से जोड़ बैठते हैं। अपने किसी प्रस्ताव के जवाब में इन्हें सिर्फ हां सुनना पसंद होता है। कोई न या कुछ देर रूकने को कह दे तो ऐसे लोग इसे अपना अपमान समझ बैठते हैं।
कुछ महिलाएं अस्वीकृति को अपनी अक्षमता या कमजोरी समझकर तनावग्रस्त हो जाती हैं तथा न कहने वाले से कई बार झगड़ा भी कर लेती हैं। ऐसी महिलाओं में अस्वीकृति को स्वीकृति में बदल सकने का जज्बा नहीं होता बल्कि अपने व्यवहार से वे संभावनाओं को और अपने क्षीण करने लगती हैं।
किसी के सामने नौकरी, उधार, विवाह संबंधों या किसी अन्य प्रस्ताव को रखते वक्त स्वीकृति और अस्वीकृति दोनों परिस्थितियों को झेलने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। ठीक है कई बार किसी व्यावसायिक अनुबंध, वैवाहिक संबंध या अन्य प्रस्तावों के ठुकरा दिए जाने से भावनाएं आहत होती हैं मगर उस अस्वीकृति से निराश होकर बैठ जाना इसका निदान नहीं है। ऐसी अस्वीकृतियों को आप सहज रूप से लें तो अनावश्यक तनाव व मानसिक पीड़ा से बच सकती हैं।
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 अस्वीकृतियों से निराश, क्रोधित होने या झेंपने की बजाय अपने प्रस्ताव पर दोबारा गौर करें, प्रस्ताव में कुछ सुधार करें या उस प्रस्ताव को किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के सामने रखें। अपने आस पास के सफल व्यक्तियों के व्यवहार व उनकी गतिविधियों पर नजर डालकर देखें।
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आप पाएंगी कि सफल व्यक्ति कभी सुस्त होकर नहीं बैठते। क्षणिक असफलताओं तथा अस्वीकृतियों को आसानी से नजर अंदाज कर देते हैं तथा सतत् प्रयत्नशील रहते हैं। समय और परिस्थिति के अनुसार आप भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाएं।
अस्वीकृति के कारणों की, अस्वीकृत करने वाले के मूड की और उसकी अपेक्षाओं की जानकारी प्राप्त करे और यथानुसार अपने व्यवहार, सेवाओं, अनुबंध प्रस्ताव में परिवर्तन लाने की कोशिश करें।
– अंजलि रूपरेला

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