अश्विन का मिलना चाहिए मौका

अश्विन का मिलना चाहिए मौका

लंदन। गत चैंपियन भारत जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रविवार को करो या मरो के ग्रुप बी मुकाबले में खेलने उतरेगा तो उस समय सभी निगाहें इस बात पर होंगी कि टीम के स्टार आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को अंतिम एकादश में जगह मिलती है या नहीं। अश्विन को चैंपियंस ट्राफी में पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ पहले दो मैचों में अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी। भारत ने पाकिस्तान को आसानी से हराया था लेकिन श्रीलंका के खिलाफ उसे 321 रन का मजबूत स्कोर बनाने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में भारतीय गेंदबाजी की कुछ कमजोरियां भी सामने आ गई थीं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले के लिए टीम प्रबंधन को अपने गेंदबाजी आक्रमण के बारे में रणनीति पहले से ही तय कर लेनी होगी और इस रणनीति में यह भी तय कर लेना होगा कि अश्विन को एकादश में मौका मिलता है या नहीं। 105 मैचों में 145 विकेट ले चुके अश्विन दुनिया के सबसे अनुभवी आफ स्पिनर है और उनके अनुभव का इस्तेमाल होना चाहिए। अश्विन निचले क्रम में रन बनाने में भी सक्षम है, लेकिन भारत को अपने गेंदबाजों से रन से ज्यादा विकेटों की जरुरत है जो श्रीलंका के खिलाफ मैच में नहीं मिल पाए थे। अगर श्रीलंका के खिलाफ मैच को देखा जाए तो टीम के एकमात्र स्पिनर रवींद्र जडेजा ने छह ओवर में 52 रन, ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने सात ओवर में 51 रन, जसप्रीत बुमराह ने 10 ओवर में 52 रन और उमेश यादव ने 9.4 ओवर में 67 रन लुटाए थे। दक्षिण अफ्रीका की टीम में बाएं हाथ के कई बल्लेबाज है जिनके खिलाफ एक आफ स्पिनर काफी कारगर साबित हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका के पास कुन्तल डी कॉक, जेपी डुमिनी और डेविड मिलर के रूप में टॉप छह में बाएं हाथ के तीन बल्लेबाज है और तीनों ही बड़ी पारियां खेलने में सक्षम है। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजी कोच नील मैकेंजी का भी मानना है कि अश्विन को उनकी टीम के खिलाफ मौका मिल सकता है। मैकेंजी के अनुसार, उनकी टीम ने अश्विन के बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी को लेकर काफी बातचीत की है। दक्षिण अफ्रीका के काफी खिलाड़ी आईपीएल 10 में खेले थे। लेकिन अश्विन आईपीएल 10 का हिस्सा नहीं रहे थे। टेस्ट सीरीज में अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका को काफी परेशान किया है। अश्विन अपनी विविधता से काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
2013 की चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में इंग्लैंड को अंतिम ओवर में जीत के लिए 15 रन की जरुरत थी। तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद अश्विन को थमाई और इस आफ स्पिनर ने अपने देश को निराश नहीं किया। उन्होंने इस ओवर में नौ रन दिये और खिताब भारत की झोली में डाल दिया। अश्विन पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम एकादश से बाहर रखने के मुश्किल फैसले पर कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि अश्विन उच्च स्तरीय गेंदबाज है और साथ ही वह बेहद प्रोफेशनल भी है। वह इस बात को समझते हैं कि हम कौन सी टीम चुन रहे हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि आप जो भी फैसला लोगे, मेरा समर्थन रहेगा। विराट का यह फैसला पाकिस्तान के खिलाफ मैच में ठीक रहा था, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ मैच में भारत को उनकी कमी काफी महसूस हुई। अब जब निर्णायक मौके की बारी आ गई है तो अश्विन को अंतिम एकादश में एक मौका मिलना चाहिए।

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