अश्लीलता एवं यौन विकृतियों की फेसबुक में घुसपैठ…ज़रूरी है सावधानी

अश्लीलता एवं यौन विकृतियों की फेसबुक में घुसपैठ…ज़रूरी है सावधानी

facebook सोशल मीडिया का ग्लैमर सिर्फ महानगरों तक ही नहीं छाया है अपितु छोटे नगर एवं कस्बे भी उससे अछूते नहीं रह गये हैं। उसके आकर्षण की परिधि में सिर्फ युवा वर्ग ही नहीं है बल्कि हर उम्र के व्यक्ति सोशल मीडिया की डोर में बंधे नजर आ रहे हैं। विशेष तौर पर फेसबुक ने हर उम्र, हर वर्ग के लोगों को लुभाया है। प्रथम दृष्टया तो इसका उद्देश्य पुराने मित्रों की खोज, नये मित्र बनाना तथा अपनी अभिव्यक्ति को मुखर करना उसे मित्रों के बीच मिल बांटना (शेयर करना) है तथा इन्हीं उद्देश्यों से वह लोकप्रिय है। लेकिन उसकी लोकप्रियता के पीछे फेसबुक की रोचक कार्यप्रणाली है जिसके तहत आपकी पोस्ट तुरंत ही मित्रों एवं पब्लिक के बीच पहुंच जाती है तथा आपकी पोस्ट की प्रतिक्रिया (जिसे जानने की जिज्ञासा हर पोस्ट करने वाले को होती है) आप तक पहुंच जाती है। लेकिन फेसबुक का मेम्बर बनने हेतु पंजीकरण के लिये प्रस्तुत की गई जानकारियों के प्रमाणित होने की बाध्यता न होने से आलम यह है कि कई शरारती तत्व अपने बाबत झूठी जानकारी (फेक आई.डी.) देने के साथ ही अपनी फोटो की जगह दूसरे की फोटो या लड़के, लड़कियों की फोटो नाम आदि डालकर शरारत कर रहे हैं, चैटिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं किसी दूसरे के एकाउन्ट को हैक कर उसके नाम से शरारत भरी पोस्टिंग कर रहे हैं। इतना ही होता तो गनीमत थी लेकिन यौनकुण्ठा से ग्रस्त कई व्यक्ति अश्लील पोस्ट कर फेसबुक के उद्देश्यों एवं सार्थकता पर पानी फेर रहे हैं। उस पर तुर्रा यह कि फेसबुक में कई समाचार पत्र एवं न्यूज चैनल्स अपनी ऑनलाइन सर्विसेस में चटपटे शीर्षकों से समाचार परोस रहे हैं।फेसबुक में सेक्स, अश्लीलता एवं यौन विकृतियों से युक्त किस तरह की पोस्टिंग की जा रही है, उसका समाज में क्या प्रभाव पड़ रहा है, उस संबंध में सबसे पहले अश्लील पोस्ट की बाबत बात करते है। नग्न महिला, विकृत यौन संबंध बनाते युग्म, पशु मैथुन, बाल मैथुन (चाइल्ड पोर्न), समलैंगिकता सभी तरह की अश्लील पोस्टिंग के दृश्य अनायास ही किसी भी ग्रुप में दृष्टिगोचर हो जाते है। जिसे कि ना चाहते हुये भी उस ग्रुप के सदस्यों को देखना पड़ जाता है बाद में भले ही उसे डीलिट कर दिया जाये तथा ऐसे पोस्ट करने वाले की पोस्टिंग ब्लाक कर दी जाये। विचित्र बात यह भी है कि कभी-कभी किसी अर्धनग्न या उत्तेजक वेशभूषा की महिला की फोटोग्राफ पोस्टिंग के साथ लिखा होता है कि इसे लाइक कर कोई अंक (मसलन 7) पोस्ट करे तो 5 मिनट के अंदर जादू दिखाई पड़ेगा साथ ही यह भी लिखा होता है कि बच्चे ट्राइ न करें या कायर लोग ट्राई न करें। जिससे  लोगों की जादू देखने की जिज्ञासा और बढ़ जाती है। मजे की बात यह है कि ऐसी पोस्टिंग को लाइक कर तथा अंक पोस्ट कर जादू देखने वालों की संख्या हजारों में होती है लेकिन लाइक करने वालों के झल्लाहट भरे कंमेंट से लगता है कि उन्हें मनवांछित जादू देखने को मिला नहीं। कुछ कंमेन्ट तो अश्लील गलियों से लबरेज होते हैं। बड़ी मजेदार स्थिति  यह भी है कि पुरुष मानसिकता के चलते प्रतिष्ठित, सम्मानित पदों में कार्य करने वाले वयोवृद्ध भी इस तरह के जादू को देखने से अपने आप को रोक नहीं पाते लेकिन लाइक कर कंमेन्ट करते ही नाम फोटो सहित फेसबुक सबको जाहिर कर देता है कि महाशय इस उम्र में भी जादू देखते है। महाविद्यालय में प्राध्यापक, नाती पोता वाले मेरे एक वयोवृद्ध मित्र जब इसी तरह के जादू देखते हुये फेसबुक में जाहिर हुये तो उन्हें मैंने आगाह किया कि आप जादू देखते हैं यह बात आपके शिष्यों से लेकर आपके नाती पोतो तक को फेसबुक ने बतला दी है, उन्होंने घबड़ाकर फेसबुक से ही तौबा कर लिया।
लव बनाम प्यार, युवा पीढ़ी बनी वासना की गुलाम…!
 विडंबना यह भी है कि ऐसी अश्लील पोस्ट करने वाले यदाकदा बदनियत से भरी शरारत में शरीफ घर की लड़कियों के फोटोग्राफ्स पोस्ट कर उसके नीचे अश्लील कंमेंट तथा मोबाइल नं. लिख कर लोगों को चैटिंग के लिये आमंत्रित करते हैं, जिससे उन लड़कियों को अश्लील कॉल्स से परेशान होना पड़ता है। संभवत: उन्हें लड़कियों के फोटोग्राफ्स फेसबुक में ही मिल जाते होंगे तथा मोबाइल नम्बर अपने परिचित दायरे से। इसके अतिरिक्त अश्लील जोक्स, गाली गलौंच भरे कॉमेन्ट्स आदि की पोस्टिंग आम बात है। एक पोस्टिंग में तो अच्छे खासे वृद्ध व्यक्ति ने अपनी पूरी तरह से नग्न फोटो ही पोस्ट कर दी थी तो कुछ अधेड़, वृद्ध व्यक्तियों द्वारा परस्पर आलिंगन, चुंबन की बात करते हुये प्रेमालाप पोस्ट किये जा रहे थे। संभवत: इस तरह की पोस्टिंग्स को यौन विकृति की श्रेणी में ही रखा जायेगा। सामान्यत: अश्लील पोस्टिंग का कोई आर्थिक पहलू नजर नहीं आता, ये सब विकृत मानसिकता, यौन विकृति के ही परिचायक है। लेकिन कुछ अश्लील पोस्टिंग विभिन्न ग्रुप से हैक कर डाली जाती है जिससे बाकायदा अश्लील फोटोग्राफ्स प्रदर्शन निश्चित अवधि के लिये निश्चित शुल्क लेकर कराया जाता है। यह अश्लीलता का व्यवसायिक स्वरूप है जो कि धड़ल्ले से फेसबुक पर हॉबी है। जिस व्यक्ति या ग्रुप के एकाउन्ट का हैक कर यह सब किया जाता है वह बेवजह बदनामी झेल कर सफाई देते हुये परेशान होता है। इस तरह की पोस्टिंग्स का दूषित प्रभाव युवा पीढ़ी पर कैसा पड़ रहा है यह अध्ययन के साथ चिन्ता का भी विषय है, क्योंकि युवा पीढ़ी में वाट्सएप वाले मोबाइल जिनके माध्यम से इंटरनेट के साथ ही फेसबुक अब उनके हाथ में है अत्यधिक लोकप्रिय है। जबकि फेसबुक के माध्यम से बने विपरीत लिंगी दोस्तों के छले जाने, यौन शोषण आदि की घटनायें आये दिन अखबारों की सुर्खियां बन रही है।अश्लील पोस्टिंग विकृत मस्तिष्क की परिचायक हो सकती है लेकिन फेसबुक में कुछ समाचार पत्र एवं न्यूज चैनल्स की ऑनलाइन सर्विसेस द्वारा सेक्स समाचार का प्रसारण विशुद्ध आर्थिक पहलू है। संभवत: उनका मानना है कि नेट यूजर्स की पहली पसंद सेक्स है जिसकी वजह से उनकी ऑनलाइन सर्विसेस अपनी टी.आर.पी. बढ़ाने के चक्कर में एक से बढ़कर एक सेक्स समाचारों इंटरनेट पर परोस रही है। कुछ हेडलाइन्स बतौर उदाहरण प्रस्तुत है- क्या वाकई असली मर्द कंडोम नहीं पहनते। बचपन में मेरा यौन शोषण हुआ, सुबह उठी तो सौतेले पिता का हाथ मेरे निजी अंगों पर था, बॉय फ्रेंड की जगह पापा को भेज दी न्यूड सेल्फी, फ्री सेक्स के पहले भारतीय महिलाओं को कुछ और चाहिये, छात्रों के सामने निर्वस्त्र हुई टीचर, चलती कार में संभोग आदि। ये सभी हेडलाइन्स देश के कुछ समाचार पत्रों एवं टी.वी. के न्यूज चैनल्स द्वारा समय-समय पर फेसबुक में अपनी ऑनलाइन सर्विसेस के माध्यम से प्रसारित किये गये हैं। क्या ये हेडलाइन्स राष्ट्रीय स्तर की किसी महत्वपूर्ण समस्या पर प्रकाश डालते हैं? फिर इनका फेसबुक में प्रस्तुतीकरण का औचित्य क्या है?इनसे क्या ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि इन समाचारों (?) के प्रस्तुतकर्ता के समाचार पत्र एवं न्यूज चैनल्स यह मानते हैं कि नेट यूजर्स की रुचि राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के समाचारों, महत्वपूर्ण राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक मुद्दों से अधिक सेक्स में है, जिसकी वजह से अश्लील पीली पुस्तकों के शीर्षकों से मिलते जुलते हेडलाइन्स में वे सेक्स समाचार नेट पर परोसने में दत्तचित्त हैं तथा यह विवेचना का विषय है कि उनका यह मानना किस हद तक उचित है?
कैसे करें मेकअप..अधिकतर युवतियों को नहीं होती सही जानकारी
 ऐसा नहीं है कि इंटरनेट की सोशल साइट फेसबुक में सिर्फ अश्लील पोस्टिंग ही की जा रही है, बल्कि इनका प्रतिशत काफी कम है पर यह पूरे फेसबुक की उपयोगिता एवं सार्थकता को कम करने वाला तथा नेट के माहौल को दूषित करने वाला है। जबकि कई साहित्यिक ग्रुप्स पूरी गंभीरता से साहित्य सृजन को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनमें कोई भी पोस्टिंग बिना एप्रूवल के सम्मिलित नहीं की जाती जिससे कि उनमें इस तरह की अवांछित अश्लील पोस्टिंग के घुसपैठ की कोई संभावना नहीं रह जाती है। काव्योदय नामक साहित्यिक ग्रुप में तो लगभग डेढ़ लाख सदस्य हैं इसमें तब तक कोई पोस्टिंग शामिल नहीं की जाती जब तक कि इसका कोई सदस्य उसे एप्रूव नहीं कर देता। इसके फाउंडर मेम्बर्स में काव्य की विधा के कुशल जानकार, उच्च पदों पर कार्यरत महिला एवं पुरुष है। इस ग्रुप में प्रतिदिन कविता लेखन हेतु एक विषय दिया जाता है तथा प्रतिदिन संध्या को एक पंक्ति जिसे शामिल करते हुये कविता रच कर पोस्ट करना पड़ता है। इस ग्रुप द्वारा रोचक ढंग से साहित्य सृजन को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके द्वारा कई बड़े आयोजन भी आयोजित किये जा चुके हैं।कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकायें, प्रकाशन संस्थान, साहित्यिक संस्थायें एवं समाचार पत्र भी फेसबुक में अपने साइट्स चला रहे हैं तथा कई धार्मिक संस्थायें भी अपनी साइट्स पर अध्यात्म को विश्लेषित कर रहे हैं। जरूरत है फेसबुक को और भी अधिक सार्थक एवं उपयोगी बनाने की तथा अश्लील एवं बेहूदी पोस्टिंग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की, फेक आई.डी. को रोकने की। क्या इसके लिये जरूरी नहीं है कि फेसबुक में हर पंजीयन प्रमाणिक आई.डी. के आधार पर ही हो, हर पोस्टिंग सेंसर हो पर वैचारिक प्रस्तुतियां यथावच पोस्ट हों।सोशल मीडिया की यह इकाई सही मायनों में सोशल रूप में स्थापित हो इसके लिये उसके स्वरूप में और अधिक संशोधन एवं संवर्धन की जरूरत है। (विनायक फीचर्स) आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
royal bulletin
टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइट
www.royalbulletin.com
और अंग्रेजी news वेबसाइटwww.royalbulletin.in को भी लाइक करे..

Share it
Share it
Share it
Top