अवैध रेत खनन करने वालों की नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी कोई डर

अवैध रेत खनन करने वालों की नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी कोई डर

rat-khananशामली। प्रदेश में अवैध रेत खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई से जांच कराने के आदेश होने के बाद भी झिंझाना, कैराना व कांधला में धड़ल्ले से रेत खनन किया जा रहा है। रेत मापिफया दिन रात यमुना का सीना चीरकर सुप्रीम कोर्ट व शासन के आदेशो को ठेंगा दिखा रहे हैं। रेत माफिया, मीडिया व प्रशासन के गठजोड के आगे सब पस्त हो गए हैं। रेत मापिफयाओं का आतंक इतना है कि पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने से डरते हैं, क्योंकि कई बार अधिकारियों पर हमले व फायरिंग की घटनाएं होने से दहशत बनी हुई है। रेत खनन का कारोबार बेखौफ होने के चलते स्थानीय नागरिकों में रोष पनप रहा है, वहीं रेत कारोबार से जुडे़ अन्य लोग परेशान होने के चलते अवैध रेत खनन क्षेत्र में बडा गुल खिला सकता है। शामली जनपद अवैध रेत खनन के लिए हमेशा सुर्खियों में रहता है। पिछले दिनों अवैध रेत खनन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय ने कडा रुख अख्तियार किया था और अवैध रेत खनन के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे, इसके साथ ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी मामले में संज्ञान लेते हुए कहा था कि अवैध रेत खनन को लेकर लीपापोती में जुटे हैं जोकि एक बड़ा अपराध है। अवैध रेत खनन पर बढते बवाल को देखते हुए इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश होने के पश्चात जिला प्रशासन ने शामली जनपद में अवैध रेत खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन रेत माफिया स्थानीय अधिकारियों, कुछ मीडियाकर्मियों के साथ गठजोड़ कर अपने धंधे को धड़ल्ले से दिन रात अंजाम देने में लगे हुए हैं।
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कस्बा कैराना, झिंझाना, इस्सोपुर टील, मंगलौरा बसेडा आदि खनन पाइंटों पर दिन छिपते ही अवैध रेत खनन शुरू हो जाता है। मशीनें यमुना का सीना चीरकर रेत निकालने के काम में जुट जाती है। सैंकड़ों बोगियों, ट्रालियों व ट्रकों के माध्यम से रेत की आपूर्ति की जाती है। रेत माफिया, मीडिया व अधिकारियों के गठजोड के आगे सब पस्त हो गए हैं। रेत माफिया कुछ मीडियाकर्मियों को खबर प्रकाशित न करने के नाम पर मोटी रकम भी देते हैं, हाथ में रकम आने के बाद कुछ समय के लिए ऐसे मीडियाकर्मी पूरी तरह चुप्पी साध लेते हैं। कई मीडियाकर्मियों की घर की रोजी रोटी तो खेत खनन से होने वाली काली कमाई से ही चल रही है। जब भी जेब में पैसा खत्म हो जाता है, ऐसे मीडियाकर्मी खनन पाइंटों पर पहुंच जाते हैं जहां रेत मापिफया उनकी जेबों को पिफर से भर देते है। रेत माफिया का आतंक इतना है कि अगर कुछ ईमानदार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी रेत खनन को बंद कराने के लिए जाते हैं तो उनके साथ मारपीट कर ट्राली तक चढाने का प्रयास किया जाता है तथा विरोध करने पर फायरिंग व जान से मारने की धमकी दी जाती है जिससे ऐसे अधिकारी या तो चुप बैठ जाते हैं अथवा अपना स्थानांतरण कराने में ही अपनी भलाई समझते हैं और रेत माफिया धडल्ले से अपने इस काले कारोबार को अंजाम देते हैं।
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