अब पूरब में ‘कमल’ खिलाने के लिए जमीन तैयार करने में जुटी भाजपा 

अब पूरब में ‘कमल’ खिलाने के लिए जमीन तैयार करने में जुटी भाजपा 

  देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड में मिली शानदार सफलता और गोवा, मणिपुर की सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा की नजर अब पूरब के अहम सूबे ओडिशा पर गड़ गई है । पूरब के इस राज्य में पिछले डेढ़ दशक से बीजू जनता दल की सरकार है। बावजूद, हाल ही में संपन्न स्थानीय पंचायत चुनाव में भाजपा पूर्व की तुलना में दस गुना अधिक वोट हासिल करने में कामयाब रही है। हालांकि राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए अभी दो वर्ष का समय बाकी है। किंतु, जिस तरह भाजपा ने चुनावों में कालाहांडी जैसे आदिवासी इलाकों में बढ़त बनाई है उससे साफ है कि आगामी चुनाव में भाजपा यहां मजबूती से पेशबंदी करेगी।
ओडिशा को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी खासा गंभीर हैं। मई 2014 में प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने के बाद से मोदी 2015 में एक बार, 2016 में तीन बार औऱ अब 2017 में ओडिशा जाने की शुरुआत कर रहे हैं। यूं तो ओडिशा में विधान सभा चुनाव में तकरीबन 2 साल का समय है, किंतु भाजपा इस सूबे में अगले विधानसभा चुनाव में ‘कमल’ खिलाने की जमीन अभी से तैयार करने में जुट गई है। यही कारण है कि, पार्टी की राष्ट्रीय कार्य़कारिणी की बैठक 15-16 अप्रैल को भुवनेश्वर में आयोजित हो रही है। इसे मोदी के मिशन 2019 का महत्वपूर्ण हिस्सा भी माना जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में देशभर से आए हजारों भाजपा नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस बात पर मंथन करेंगे कि भाजपा के लिए अब तक अछूते रहे हिस्सों में विजय पताका कैसे लहराई जाए। इसके अलावा बैठक में कर्नाटक, गुजरात समेत हिमाचल प्रदेश के विधासनभा चुनावों पर अलग से चर्चा हो सकती है। इतना ही नहीं, यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ओडिशा को केंद्र बना भाजपा पश्चिम बंगाल और केरल तक अपनी राजनीतिक जमीन को ‘कमल’ के लिए उर्वर करेगी।
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 2019 में भी एकजुट रहेगा 33 दलों वाला राजग का कुनबा

भुवनेश्वर में हो रही दो दिवसीय कार्यकारिणी की बैठक से पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई राजग के घटक दलों की बैठक में 33 दल के नेता शामिल हुए। बैठक में आम सहमति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि, 2019 में राजग मोदी की अगुवाई में आम चुनाव में सफलता हासिल करने उतरेगा। जाहिर है कि इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद से भाजपा का हौंसला और बुलंद हुआ है और वह घटक दलों के विश्वास पर खरी उतरी है। ऐसे में अगर कोई अन्य दल भी राजग के कुनबे की ओर खींचा चला आए तो हैरत न होगी।
20 साल बाद ओडिशा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

ओडिशा में 20 साल बाद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है। इससे पहले 1997 में भुवनेश्वर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हुई थी। उसके बाद राज्य में भाजपा और बीजू जनता दल के बीच गठबंधन हुआ था। जिसके बाद 1998 में केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार बनी और बीजद इसमें शामिल हुआ। ओडिशा में भी भाजपा-बीजद गठबंधन की सरकार बनी। हालांकि अब इन दोनों पार्टियों के बीच संबंधों में तल्खी आ चुकी है। इन 20 सालों के बाद भाजपा एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रुप में ओडिशा पहुंच रही है। ऐसे में भाजपा आलाकमान का भी मानना है कि बीजद सरकार की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। दिलचस्प बात ये है कि भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद से अमित शाह ओडिशा से ही राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हुए।
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केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान कहते हैं कि ओडिशा में प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता ग्राफ देश के बाकी हिस्सों से ज्यादा है। इस भीषण गर्मी में भुवनेश्वर में कार्यकारिणी रखने का मतलब ही यही है कि ये राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। धर्मेन्द्र प्रधान की मानें तो केरल से लेकर बंगाल तक भाजपा अपना परचम लहराएगी जिसका केंद्र ओडिशा होगा। 

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