अब जरूरी नहीं है घुटने बदलना जोड़ों के दर्द में

अब जरूरी नहीं है घुटने बदलना जोड़ों के दर्द में

painसामान्यत: एक स्वस्थ व्यक्ति में कूल्हे का केन्द्र बिन्दु, घुटने का केन्द्र बिन्दु और पैर का केन्द्र बिन्दु, तीनों एक सीध में होते हैं लेकिन घुटनों के आर्थराइटिस के हर मरीज़ में यह अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। इस बिगड़े हुए अलाइनमेंट को अभी तक आपरेशन द्वारा अथवा घुटना बदल कर ही ठीक किया जाता था जिससे घुटना दर्द रहित हो जाता था किन्तु अपने बीस वर्ष के अनुभव से डा. शल्या इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि घुटनों की आर्थराइटिस के हर 1000 रोगियों में 999 रोगी बिना आपरेशन केवल जीवन शैली बदलकर और कुछ दवाओं और विशेषरूप से विकसित ब्लाक व बेल्ट की सहायता से एलाइनमेंट ठीक करने वाली विशेष एक्सरसाइज द्वारा आराम पा सकते हैं और इस महंगे आपरेशन से बच सकते हैं।
डॉ. शल्या के अनुसार आस्टिओआर्थराइटिस मूलत: जीवन शैली व वृद्धावस्था से संबंधित बीमारी है जिससे पीडि़त मरीज विशेषत: बड़ी आयु के मरीजों का चलना, फिरना और उठना बहुत कठिन हो जाता है। अन्तत: या तो वे लंगड़ा कर चलते हैं या उन्हें घुटनों का आपरेशन करवा कर कृत्रिम घुटना लगवाना पड़ता है।
डा. शल्या अपने रोगियों को अपने क्लीनिक में कुछ विशेष प्रकार के व्यायाम करवाते हैं जिनसे धीरे-धीरे हड्डियां व जोड़ टेढ़े हुए अलाइनमेंट को ठीक करके अपनी स्वाभाविक स्थिति में आ जाते हैं। डा. शल्या केवल उन्हीं मरीजों का इलाज करते हैं जो उनके कड़े अनुशासन में रहकर उनके बताए गए ढंग के अनुसार अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करने को तैयार हैं।
मोटापा आस्टिओआर्थराइटिस का सबसे प्रमुख कारण है। मोटापा घटाए बिना न तो घुटनों का आपरेशन सफल हो सकता है और न ही डा. शल्या का इलाज पूर्ण हो सकता है। मरीजों को बुढ़ापा रोकने वाले तत्वों एण्टी आक्सीडेंट से भरपूर पूर्णरूपेण शुद्ध शाकाहारी सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है जिससे मरीजों का न केवल दर्द शीघ्र कम हो जाता है बल्कि वे आसानी से चलने-फिरने लायक हो जाते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार शरीर का 1 किलो वजन घुटनों पर 10 किलोग्राम का अतिरिक्त भार डालता है अत: वजन कम करना भी इस चिकित्सा का महत्त्वपूर्ण अंग है। उनके क्लीनिक पर रोगियों का प्रतिमाह 3-10 किलो वजन कम हुआ है। अधिकतम एक रोगी महिला का 55 किलो वजन कम हुआ है।
डा. सुभाष शल्या अपने मरीजों को चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स भी बंद करने को कहते हैं क्योंकि उनमें मौजूद कैफीन से आर्थराइटिस का दर्द बढ़ता है। इस प्रकार यह चिकित्सा न केवल आर्थराइटिस के दर्द से छुटकारा दिलाती है बल्कि शरीर के मोटापे को भी कम करती है। इसके अतिरिक्त उच्च रक्तचाप व मधुमेह के मरीजों की स्थिति में भी काफी सुधार देखा गया है।
मरीजों को पालथी व उकडूं न बैठने और टांग पर टांग न रखने की सलाह दी जाती है ताकि घुटनों का अलाइनमेंट ठीक रहे। इसके अतिरिक्त सीढ़ी चढऩे उतरने में रेलिंग का सहारा और जूतों व चप्पलों में एक तरफ विशेष मुलायम गद्दी जैसा तला भी जोड़ों को खराब होने से बचाने में लाभप्रद है। घुटनों को प्राय: 90 डिग्री से अधिक नहीं मोड़ा जाना चाहिए।
जिन मरीजों की जोड़ों की कार्टिलेज खराब हो जाती है उन्हें अत्याधुनिक दवाएं देकर उनकी कार्टिलेज मरम्मत की जा सकती है किन्तु इसके लिए मरीज का वजन सामान्य होना तथा टांगों व घुटनों का अलाइनमेंट ठीक होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त रोगी का अलाइनमेंट व वजन सामान्य होने पर घुटने में कृत्रिम चिकनाई के इंजेक्शन भी दिए जाते हैं जिससे जोड़ युवावस्था की तरह चिकनाईयुक्त हो जाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए डा. शल्या से फोन नं. 011-26972566 और 98101-24433 पर सम्पर्क किया जा सकता है। डा. शल्या के इलाज के कारण आज सैंकड़ों ऐसे मरीज जो घुटनों की गंभीर आर्थराइटिस के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थे, न केवल साधारण जीवन व्यतीत कर रहे हैं बल्कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों पर काबू पा चुके हैं व कैंसर के खतरे से बच चुके हैं।
-अशोक गुप्त

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