अब खत्म होगा कर का आतंक

अब खत्म होगा कर का आतंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी विधेयक के सदन में पास होने के बाद उम्मीद जाहिर की है कि अब देश को ‘कर आतंकवाद’ से निजाद मिल जाएगी। इस प्रकार देखा जाए तो देश के प्रधानमंत्री को भी यह लगता रहा है कि आमजन पर जो टैक्स का भार डाला गया है वह किसी आतंक से कम नहीं है। इसलिए ‘एक देश एक कर’ की बात कही जा रही है। सवाल यह है कि यही समझदारी भाजपा और उसके अन्य सहायोगियों को उस समय क्यों नहीं आई जबकि केंद्र में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार थी और वो जीएसटी बिल लेकर सदन में आई थी। तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने इसका जोरदार तरीके से विरोध किया था और कहा था कि यह राज्यों के विकास में रोढ़ा साबित होने वाला बिल है और उसे पास नहीं होना चाहिए। इस आशय की बात करने वाले अब मान रहे हैं कि देश के उपभोक्ताओं पर विभिन्न प्रकार से लगाए गए कर किसी आतंक से कम नहीं है इसलिए इस पर पाबंदियां आयद होनी चाहिए। बहरहाल देर आयद दुरुस्त आयद की तर्ज पर जीएसटी बिल पास कर दिया गया और अब इसका स्वागत देश के विपक्षी ही नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी कर रहे हैं। राष्ट्रपति ओबामा का कहना है कि इस बिल से भारत में व्यापार करना आसान होगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा। यहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश के विकास में जीएसटी अहम भूमिका निभाएगा और यह देश की जनता के लिए फायदेमंद होने वाला है। इस प्रकार जीएसटी को लेकर देश-विदेश के नेताओं की राय एक है और इसलिए कहा जा सकता है कि इसे बहुत पहले देश में लागू कर दिया जाना चाहिए था।इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में जीएसटी विधेयक में संशोधनों पर बहस में हिस्सा लेते हुए इस विधेयक को `टीम इंडिया का महान कदम, बदलाव की दिशा में बड़ा कदम और पारर्दिशता की दिशा में बड़ा कदम’ बताया और कहा कि इस कानून का एक बड़ा संदेश यह होगा कि `उपभोक्ता राजा है’। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस नेता एम. वीरप्पा मोइली के उस तर्क का विरोध किया, जिसमें मोइली ने कहा था कि सरकार ने इस समान कर कानून पर सिर्पâ राज्यसभा के नेताओं से मशविरा किया और लोकसभा को एक कनिष्ठ साझेदार बना दिया। इस बयान का विरोध कर रहे प्रधानमंत्री ने कहा कि `इस तरह की बात अनावश्यक है।’ उन्होंने बताया कि जब उनकी सरकार ने जीएसटी पर राय-मशविरा शुरू किया तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, और मनमोहन सिंह दोनों से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि `एक लोकसभा सांसद हैं, और दूसरे राज्यसभा सदस्य हैं। मैंने दोनों सदनों के साथ समान व्यवहार किया। यहां यह नहीं भुलाया जा सकता कि कांग्रेस सदा से इस विधेयक के समर्थन में रही है और इसी वजह से कांग्रेस नेता और लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने के समय सदन में सभी सांसदों की मौजूदगी तय करने की बात कही थी।
ऐसे घटिया लोगों के रहते बेमानी है देश के भले की उम्मीद
वहीं सिंधिया ने कहा था कि सरकार के लिए किसी तरह से कर की अधिकतम दर तय करना महत्वपूर्ण है। यह सब इसलिए कहा गया और किया गया क्योंकि यह संविधान संशोधन विधेयक जीएसटी के गुण-दोषों के आधार पर था। जीएसटी देश के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बाद 122 वें संविधान संशोधन विधेयक को राज्यसभा में पारित किया गया और उसके बाद कांग्रेस पार्टी के सभी लोकसभा सदस्यों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी किया गया। यह बताता है कि जीएसटी का विचार सबसे पहले कांग्रेस ने ही दिया था। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपने बजट भाषण में देशभर में एक कर प्रणाली की अवधारणा की बात की थी। उसके बाद 2011 के बजट सत्र में तत्कालीन सरकार ने जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, लेकिन भाजपा चार साल तक आम-सहमति नहीं बना सकी। नतीजतन विधेयक निष्प्रभावी हो गया। अब शुक्र है कि विधेयक पास हो गया जिसका चहुंओर से स्वागत हो रहा है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि यह सरकार की जीत और विपक्ष की हार है, बल्कि इसके लिए विपक्ष की भूमिका की सराहना दिल खोलकर होनी चाहिए, जिसने पूर्ण सजगता और सचेतक की भूमिका निभाते हुए इस बिल को पास करवाने में महती भूमिका अदा की। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वो जीएसटी से जुड़े मुद्दों को देख चुके हैं इसलिए आज प्रधानमंत्री के रूप में इन समस्याओं को सुलझाने में उन्हें आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यह सच है कि पूर्व में राज्यों और केंद्र के बीच एक अविश्वास की स्थिति बनी हुई थी लेकिन अब दोनों के बीच अच्छे संबंध विकसित हुए हैं, क्योंकि सदस्य जीएसटी पर चर्चा के लिए संसद में दलगत संबद्धताओं से ऊपर उठ गए। बहरहाल अब राज्यों और केंद्र के बीच एक आम सहमति बनाने की आवश्यकता है। लोकसभा में यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत से पारित हुआ। अब देखने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार इस पर किस प्रकार काम करती है और कितनी जल्दी ‘कर के आतंक’ से देश की जनता व उपभोक्ता को निजाद दिलवाती है।

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