अनिवासी निवेशकों ने उभरते बाजारों से 23 अरब डॉलर निकाले

अनिवासी निवेशकों ने उभरते बाजारों से 23 अरब डॉलर निकाले

लंदन। अनिवासी निवेशकों ने गत अक्टूबर से अब तक उभरते बाजार वाले देशों से 23 अरब डॉलर की निकासी की है जिसमें सबसे ज्यादा निकासी भारत से की गयी है।
इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल फाइनेंस की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, गत 08 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में श्री डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद से इन बाजारों से अनिवासी निवेशकों द्वारा 18 अरब डॉलर निकाले जा चुके हैं। इस 18 अरब डॉलर में से 11.3 अरब डॉलर डेट सिक्योरिटीज से निकाले गये हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल निकासी की आधी राशि भारत से निकाली गयी है। अनिवासी निवेशकों ने भारतीय शेयरों और बांडों दोनों की बिकवाली की है, जिससे स्पष्ट है कि दोनों का आकर्षण उनके लिए कम हुआ है। आईआईएफ का कहना है कि ऐसा संभवत: भारत में हुई विवादास्पद नोटबंदी की वजह से हुआ है।
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संगठन ने इंडोनेशिया, भारत, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, फिलीपींस, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और हंगरी के बाजारों का अध्ययन करके यह रिपोर्ट जारी की है। इसमें दक्षिण कोरिया ही एक ऐसा बाजार रहा, जहाँ इस अवधि में निवेश अधिक हुआ और इनमें अधिकतर निवेश वहाँ की राष्ट्रपति पार्क ग्यून ही के खिलाफ लाये गये महाभियोग के बाद हुआ। दक्षिण अफ्रीका औरर थाईलैंड से भी अच्छी पूँजी निकासी हुई है। आईआईएफ के अनुसार, उभरते बाजारों से पूँजी निकासी के लिए श्री ट्रंप की जीत एक बड़ा कारक मानी जा सकती है, लेकिन ऐसे कई अन्य कारण भी हैं जिनकी वजह से साल की पहली तीन तिमाहियों में उभरते बाजारों में पैसा लगाने के बाद अंतिम तिमाही में वे बिकवाल रहे हैं। ब्रेग्जिट, चीन से पूँजी निकासी, दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर में वृद्धि की संभावना और उसके बाद हुई वृद्धि से भी पूँजी निकासी को बल मिला है।

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