अनमोल वचन

अनमोल वचन

झरने के नीचे बैठकर ही नहाया और पानी पिया जा सकता है, प्याऊ में झुककर ही ओक से पानी पिया जाना सम्भव है। घडे के सामने बर्तन को नीचे रखकर पानी भरना पडता है। ये सब नम्रता के लक्षण हैं। हमारे जीवन व्यवहार का एक प्रमुख अंग है विनम्रता। इससे हमारी अन्य शक्तियां क्रियाशील बनती हैं। जिस व्यक्ति के विचार ऊंचे होते हैं, वह सदैव नम्र और सुशील बना रहता है। अहंकार का दोष उसे छू नहीं पाता। कुछ लोग बडे अधिकारी बन जाते हैं, ऊंचे तथा महत्वपूर्ण पद पर बैठ जाते हैं। कुछ व्यापार में सफल होकर बडे व्यापारी बन जाते हैं, किन्तु देखने में आता है कि उनमें अहंकार का दोष भी आ जाता है। वे अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते, किन्तु ऐसे व्यक्ति बडी शीघ्र निराशा और असफलता का मुंह भी देखते हैं। इसी कारण चिरकाल से ही मनीषी यह सीख देते आये हैं कि अहंकार का त्याग कर विनम्र बनें। विनम्रता लम्बे समय तक सफलता दिलाती है। गुरू अमरदास ने समाज में फैली ऊंच-नीच एवं भेदभाव की विकराल रूप ले चुकी प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिये सामूहिक लंगर की प्रथा का आरम्भ किया। परमात्मा का भक्त वही बन सकता है, जिसमें श्रद्धा और आस्था के साथ अनुशासन और नम्रता हो। जिस व्यक्ति के विचार जितने ऊंचे होंगे, वह उतना ही नम्र और सज्जन होगा। अहंकार का दोष उसमें आ ही नहीं पायेगा।

Share it
Top