अनमोल वचन

अनमोल वचन

मानव जन्म के पश्चात ही नहीं, वह जब गर्भावस्था में होता है, तभी वह संस्कारों द्वारा शुद्ध किया जाता है। जन्म के पश्चात उसे संस्कारों द्वारा सही अर्थों में मानव बनाया जाता है। महाभारत में अभिमन्यु को चक्रव्यूह तोडने की कला अर्जुन द्वारा उसकी माताश्री को बताये आधार पर ही प्राप्त हुई थी। इसलिए सोलह संस्कारों में प्रथम संस्कार गर्भावस्था में ही किया जाता है। इन दिये हुए संस्कारों के कारण ही वह चेतना, आनन्द शक्ति तथा देवत्व का अनुभव करता है। यह सहजता से ही कहा जा सकता है कि संस्कार, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि के प्रबल साधन हैं। संस्कारों की विशेषता यह है कि ये जीवन भर व्यक्ति के व्यवहार और आचरण को प्रभावित करते हैं। महर्षि अंगिरा के अनुसार जिस प्रकार रंगों से चित्रकार रंग बनाता है, उसी प्रकार विधिपूर्वक किये गये संस्कारों द्वारा ब्रह्मत्व सम्पादित होता है। यही कारण है संस्कार अपनी प्रकृति के अनुसार मानव का समय-समय पर मार्गदर्शन करते हैं। अच्छे संस्कार भटकाव, दुख तथा अवसाद आदि से दूर रखते हैं। उचित यही होगा कि अभिभावक शिशुओं को प्रारम्भिक अवस्था से ही अच्छे संस्कारों से सुसंस्कृत करें। इससे न केवल समाज में फैला अंधकार दूर होगा, बल्कि भारत का पुन: विश्व गुरू बनने का स्वप्न भी साकार होगा।

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