अनमोल वचन

अनमोल वचन

वर्तमान परिवेश में समाज में बढते अपराधों तथा अश्लीलता का एक प्रमुख कारण संस्कार विहीनता है। वर्तमान में ऐसे अभिभावकों की संख्या न्यून ही है, जो आधुनिक भौतिकता से कहीं दूर अपने बच्चों में संस्कारों पर बल देते होंगे। वर्तमान में सच्चाई यह है कि येन-केन-प्रकारेण धन व साधन जुटाकर अभिभावक अपने कर्तव्यो की इतिश्री मान लेते हैं, परन्तु कालान्तर में अनेक बच्चों द्वारा अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने पर सामाजिक वातावरण में पैदा हुई बुराईयों को कोसते हैं, अपनी सन्तान की अपराधिक गतिविधियों का कारण उसी को मानते हैं। मनीषी सदा से ही सदाचारयुक्त आचरण की शिक्षा देते आये हैं, परन्तु बहुधा उनकी उपेक्षा ही की गई। वैदिक वांग्यय में गर्भावस्था से मृत्यु पर्यन्त सोलह संस्कारों का वर्णन किया गया है। संस्कार शब्द का अर्थ दोषों के निवारण से है, संस्कारों से अन्त:करण की शुद्धि होती है। मानव के चरित्र निर्माण हेतु संस्कार ही आधारशिला हैं। यह पदम सत्य है कि संस्कारविहीनता के कारण ही चरित्रहीनता सीमा को छूने को तत्पर है। चरित्रहीनता इस सीमा तक जा पहुंची है कि प्रत्येक सामाजिक और पारिवारिक रिश्ता तार-तार हो गया है। यदि इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, बच्चों को संस्कारित करने को प्राथमिकता नहीं दी गई तो समाज में आपसी सम्बन्धों में विश्वास ही समाप्त हो जायेगा। उसकी परिणिति किस रूप में होगी, कल्पना कर हृदय कांप उठता है।  

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