अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में अनेक धर्म प्रचलित हैं। उनके रीति रिवाजों और दिशानिर्देशों में काफी अन्तर भी पाया जाता है, फिर भी उनका मूल उद्देश्य एक ही है कि वह अपने अनुयायियों को संयमी, सदाचारी, उदार और सज्जन बनाना। इन सभी धर्म संस्थापकों का मूल उद्देश्य एक ही रहा है सत्य के निकट पहुंचना। पदम पुराण में कहा गया है कि सत्य से पवित्र हुई वाणी बोलें और मन में जो पवित्र जान पडे, उसी का आचरण करें। मन वचन और कर्म को एक रूप किये बिना हम कितना भी प्रयास क्यों न करें, हम सिद्धि प्राप्त नहीं कर सकते। सत्य और सरलता का अटूट सम्बन्ध है। सत्य अहिंसा के बिना अधूरा है। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि सत्य सरल होता है, क्योंकि उसमें न कुछ जोडना है, न घटाना है। जैसा है, जो है बिल्कुल वही कहना, वही स्वीकार करना। हमारी भलाई इसी में है कि हम इस जगत के सत्य को पहचानें, सत्य के पथ पर चलने का संकल्प लें। सत्य का वास्तविक अर्थ पर ब्रह्म है। वेद कहता है कि ‘सृष्टि के मूल में यही ब्रह्म सत्य के रूप में विद्यमान था, त्रिगुणात्मक संसार इसके बाद रचा गया। जिसने सत्य के मार्ग को नहीं चुना, उसे आनन्द की प्राप्ति असम्भव है। यदि हम आनन्द की खोज में हैं, सच्चे सुख की लालसा है तो हमें सत्य के मार्ग पर चलना ही होगा। सत्य का कोई विकल्प है ही नहीं।

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