अनमोल वचन

अनमोल वचन

भारतीय संस्कृति में सबके भले की कामना की जाती है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ जैसी प्रार्थना भारतीय संस्कृति की देन हैं और केवल भारतीय संस्कृति के अनुयायी ही ऐसी प्रार्थना कर सकते हैं। यद्यपि ऐसी भावना सभी मनुष्यों की, चाहे वे धरती के किसी भी भाग के रहने वाले हों, होनी चाहिए। हम अपने कर्म और वाणी से ऐसा एक भी शब्द न निकालें और न ऐसा कृत्य करें, जो दूसरों को कष्ट पहुंचाता हो। यह वाणी के संयम और कर्म के विवेक से ही सम्भव हो सकता है, परन्तु हमारी स्थिति आज उस सुन्दरी की तरह है, जो चाहती है कि सारी दुनिया उसे प्यार करे, परन्तु वह किसी को प्यार न करे। बहुधा हम यह भूल जाते हैं कि यह संसार आदान-प्रदान पर चलता है। जैसा हम बोयेंगे, हमें फल भी उसी के अनुसार प्राप्त होगा। विश्व में आज जिस प्रेम, सहिष्णुता, परोपकार, संवेदना और भाईचारे की आवश्यकता है, आज संसार के लोगों में उसका नितांत अभाव है। आपसी मेल और प्यार का अपना महत्व है। उससे वह शक्ति, उत्साह तथा ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो किसी अन्य चीज से पैदा नहीं हो सकती। दुख इस बात का है कि आज के युग में मानव व्यापक हितों को नजरअंदाज कर निजी स्वार्थों का पोषण कर रहा है। वर्तमान में सारी व्याधियां इन्हीं क्षुद्र स्वार्थों और संकीर्ण मानसिकता के कारण है और इसी कारण सारे संसार में दुख और निराशा व्याप्त है।

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