अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में जिन लोगों ने ‘सफलताएं’ प्राप्त की हैं, उन्होंने सपने कम देखे हैं और प्रयत्न अधिक किये हैं। वे जानते हैं कि असफलताएं और बाधाएं अप्रत्याशित नहीं होती। वे इस वास्तविकता को जानते हैं कि असफलताओं को परास्त करके ही जो आदमी दृढता का परिचय देता है, सफलताओं की विजय माला उन्हीं के गले की शोभा बढाती है। वे पहले से ही यह सोचकर आगे बढते हैं कि बार-बार असफलता का मुंह देखने के बाद भी आगे बढते चलना है और सफलता प्राप्त होने तक धैर्यपूर्वक अविचल भाव से प्रयत्न और पुरूषार्थ करने में लगे रहना है। जैसे बीज बोने से लेकर अंकुर पैदा होने, पौधे के बडे होने, बढकर पूरा वृक्ष बनने और अंत में फलने-फूलने में समय तो लगता ही है। प्रयत्न भी करते रहना पडता है, किन्तु कुछ व्यक्तियों की मनोवृत्ति बालकों जैसी होती है। वे अधीरतापूर्वक बडे-बडे सत्परिणामों की आशाएं बांधते हैं और उनके लिये जितना श्रम और समय चाहिए, उतना लगाने को तैयार ही नहीं होते। उन्हें तो सब कुछ तुरत-फुरत ही चाहिए। ऐसी बाल बुद्धि रखकर यदि किसी बडी सफलता का आनन्द प्राप्त करने की आशा की जाये तो वह दुराशा मात्र ही होगी। इसमें दोष किसी का नहीं, उनकी उतावली का ही है।

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