अनमोल वचन

अनमोल वचन

उलझनें सभी के जीवन में आती हैं। इन उलझनों को सुलझाने में, उन्नति के मार्ग में आये अवरोधों को हटाने में हमारी शक्ति का बहुत बडा भाग व्यय होता रहता है, फिर भी कुछ समस्याएं अनसुलझी रह जाती हैं। बहुत कम ही ऐसी होती है, जिनके समाधान से संतुष्ट हुआ जा सकता है। उलझनों के सुलझाव में अपूर्णता का कारण यह है कि हम समस्याओं का समाधान बाहर ढूंढते हैं, जबकि वह हमारे भीतर ही छुपा रहता है। जो मन को रूचता है, जो जंचता है, उसके अनुकूल परिस्थितियां प्राप्त करने की अभिलाषा सभी को रहती है, पर वैसी परिस्थितियां मिल ही जायें, इसका कोई ठिकाना नहीं। उनका मिलना इस बात पर निर्भर नहीं है कि हम ऐसा चाहते हैं, बल्कि वह हमारी योग्यता, पुरूषार्थ, अवसर, सहयोग, साधन एवं प्रारब्ध आदि अनेक बातों के मिलने से अधिक निर्भर करता है। परिस्थितियां आपके पक्ष में नहीं हैं, तो मनोरथ सिद्ध होना असम्भव हो जाता है, परन्तु आकांक्षाएं करते समय हम इन सब बातों पर ध्यान कहां दे पाते हैं। यदि हम किसी आकांक्षा को करने से पहले अपनी सामथ्र्य और परिस्थितियों का अनुमान लगा लें तो उसी के अनुसार हम अपनी चाहत को सीमित करें, तो कदाचित उसका पूर्ण होना अधिक कठिन न हो।

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