अनमोल वचन

अनमोल वचन

जिसे हम जीवन कहते हैं, वह जीवन नहीं और जिसे हम मृत्यु कहते हैं, वह मृत्यु नहीं। जीवन और मृत्यु तो केवल प्रकृति के परिवर्तन मात्र हैं। प्रकृति में जो घटित हो रहा है, वह सब तो परिवर्तन है। जो जन्म लेता दीख रहा है, वही नष्ट होता भी दिखाई देता है। जिसका सृजन होता दिखता है, वही विसृजन की ओर जाता दृष्टिपात होता है। पैड-पौधे हों या पशु-पक्षी, झोपडे हों या अट्टालिकाएं, नगर हो या जंगल हों, पहाड हो अथवा खाईयां हों, सागर हो या मरूस्थल हो, सभी तो परिवर्तन रूपी सरिता में बहे जा रहे हैं। जहां कल नगर थे, आज वहां वीरान है, जहां बस्तियां थीं, वहां आज उल्लू बोल रहे हैं। जहां कल उल्लू बोल रहे थे, आज वहां नगर विद्यमान हैं। जहां मरूस्थल था, वहां महासागर हिलोरे ले रहा है। जहां सागर थे, वहां आज मरूस्थल दिखाई दे रहे हैं। बडे-बडे गड्ढों की जगह पहाड खडे हो गये हैं, जहां पहाड थे, वहां घाटियां बन गई हैं, जहां बडे-बडे वन थे, वहां भूमि बंजर और पथरीली हो गई है और जो बंजर थी, पथरीली थी, वहां बाग-बगीचे तथा हरियाली फैली है। ऐसे परिवर्तन होते रहे हैं और होते रहेंगे। इसलिए मृत्यु को सब कुछ समाप्त हो गया ऐसा मानना हमारी अज्ञानता है। यह सब तो मात्र परिवर्तन है, जो स्वाभाविक है। प्रकृति के स्वाभाविक परिवर्तन से भय कैसा?

Share it
Top