अनमोल वचन

अनमोल वचन

भगवान से प्रार्थना सभी धर्मों में की जाती है। जब हम प्रार्थना करते हैं और सच्चे मन से करते हैं, तभी समझिये कि हम प्रार्थना कर रहे हैं अन्यथा वह हमारे द्वारा किया पाखंड दिखावा और ढोंग है। हर रोज मन्दिरों से लोग घंटे घडियाल बजाकर जोर-जोर से ध्वनि विस्तारक पर चिल्ला-चिल्लाकर प्रार्थना करते हैं, परन्तु क्या वह वास्तविक प्रार्थना है। क्या इसे ध्यान में लीन होकर परमतत्व से लौ लगाकर एकाग्र मन से की गई प्रार्थना कह सकते हैं। यदि ऐसा नहीं है तो उस फल की आकांक्षा क्यों करते हैं, जिसे आप प्रार्थना में मांगते हैं। वस्तुत: प्रार्थना तो वही है, जिसमें मन की एकाग्रता हो। प्रार्थना में अपने उच्च स्तर से परमात्मा से यही कहा जाता है कि वह कृपा करे और प्रकाश की ऐसी किरण प्रदान करे, जिससे सर्वत्र दीख पडने वाला अंधकार दिव्य प्रकाश के रूप में परिणित हो जाये। इसलिए हम जो भी कार्य आरम्भ करें, प्रार्थना अवश्य करें। इससे हमारी आत्म शक्ति में वृद्धि होती है। आत्म शक्ति पुरूषार्थ बढाती है और अन्तत: पुरूषार्थ ही हमें सफलता की मंजिल पर पहुंचाता है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रार्थना प्रेरणा के रूप में सहायक बनती है।

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