अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार सदा रहने वाला नहीं, मित्र सदा रहने वाले नहीं हैं, परिवार और सगे सम्बन्धी भी सदा रहने वाले नहीं हैं। स्वार्थ आधारित रिश्ते समय आने पर आंखें फेर लेते हैं। इन्सान अपने स्वार्थों को इतनी प्राथमिकता देता है कि वह इस भ्रम में रहता है कि उसे अनन्त काल तक यहीं रहना है। वह क्षण भंगुर को ही शाश्वत मान बैठता है और जो शाश्वत है, उसे भुलाकर अपनी मूर्खता का प्रमाण देता है। युगो-युगो से मनीषी यह सच्चाई हमारे सामने रखते आ रहे हैं कि बाकि सब मिट जाता है, परन्तु परमात्मा शाश्वत है, इस परमात्मा का आधार लेने से ही जीवन में सहजता आती है और मोक्ष प्राप्ति होती है। संसार से सच्चे सुख की आस लगाना बुद्धिमानी नहीं। सच्चे सुख की अभिलाषा यदि है तो परमात्मा की शरण में जाओ। परमात्मा का बोध प्राप्त करने से ही आत्मा का उद्धार होगा। इन्सान इस सच्चाई को समझ ले तो वह भ्रमों से ऊपर उठकर आनन्द और शान्ति को प्राप्त कर ले। परमात्मा की शरण में जाने का मार्ग है क्या? सीधा सा उत्तर है प्रत्येक प्राणी में परमात्मा तत्व के दर्शन करो, दीन दुखियों की सेवा करो, सभी के शुभ की कामना करो, मन, वाणी और कर्म से कोई पाप न करो। किसी के भी साथ वह व्यवहार न करो, जो आपको अपने साथ पसंद नहीं, इससे आत्मा में स्वच्छता आयेगी और परमात्मा का सामीप्य प्राप्त होगा।

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