अनमोल वचन

अनमोल वचन

जब तक हम स्वयं को उपलब्ध न हो जायें, तब तक हमें सत्यदृष्टा के वचनों पर श्रद्धा रखनी चाहिए, क्योंकि यही श्रद्धा हमारे मन को साधना पथ पर निरंतर गतिमान रखती है। अज्ञानियों का जन्म-मरण बार-बार होता है, जबकि ज्ञानी पुरूष एक ही बार मरण को प्राप्त होता है। धर्म का मूल संदेश यही है कि जैसा करोगे, वैसा ही भरोगे। जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे। दूसरों के लिये कांटे बिछाओगे तो स्वयं तुम्हें भी उन पर चलना होगा, इसलिए दूसरों के लिये फूल बिछाओ, उनके मार्ग को सरल बनाओ। सांसारिक जीवन में सुख क्षणिक है, दुख अधिक है। इस क्षणिक सुख की प्राप्ति के लिये मानव कितना दुख भोग रहा है। यह सुख तलवार की धार पर लगे शहद की भांति है। आज देश में साम्प्रदायिक तनाव प्रत्येक क्षेत्र में देखा जा सकता है, इसका मूल कारण है कि व्यक्ति धर्म के मूलभूत सिद्धांतों, आदर्शों को भूल गया है। धर्म बाह्य आडम्बर मात्र रह गया है। सामाजिक कुरीतियां आज की ज्वलंत समस्याएं हैं। कुरीतियों को मिटाने के लिये युवक-युवतियां सामूहिक रूप से प्रतिज्ञा करें, आंदोलन के रूप में इन कुरीतियों को दूर कराने में सहयोग दें। दहेज को पाप मानें। रिश्वतखोर तथा भ्रष्टाचारी भले ही आपके निकट सम्बन्धी हों, उनसे कोई सम्बन्ध न रखें। समय के एक-एक पल का सदुपयोग करें, यह दुर्लभ है, अनमोल है। दुनिया की सारी दौलत देकर भी एक पल नहीं खरीदा जा सकता।

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