अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में कोई बिरला ही होगा, जो दुख-सुख अथवा बीमारी से रहित हो। दूसरों के साथ हमारे द्वारा किये गये व्यवहार से ही हमारी परख हाती है। संवेदनशील व्यक्ति केवल अपने लिये ही नहीं, बल्कि अन्जान लोगों के भी दुख-दर्द को देखकर व्यथित हो जाते हैं। हमारे आसपास ऐसे बहुत सारे साधन विहीन और लाचार लोग मिल जाते हैं, जो किसी की भी संवेदना को झकझोरने के लिये पर्याप्त हैं। किसी बीमारी अथवा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति साधनों के अभाव और गरीबी से पीडित हो, वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। ऐसे में यदि हमारी छोटी सी मदद उसे राहत दिला दें तो यह हमारी हजार बडी खुशियों से भी एक बडी खुशी होगी। आप किसी बाल आश्रम, वृद्धाश्रम में जायें तो पायेंगे कि लोग कितने दुखी और परेशान हैं। बिना मां-बाप के बच्चों को देखकर मन भर आता है, सोचने को बाध्य होते हैं कि इनका भविष्य क्या होगा। वृद्धाश्रम में जायें तो पता चलेगा कि सम्पन्न घरों तक के वृद्ध मां-बाप उसी शहर में शानदार मकानों में रहते हैं और वे मकान उन्हीं वृद्ध माता-पिता की गाढी कमाई से बने होते हैं। उनके साथ थोडा समय गुजारकर उनका दर्द बांटोंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा। यदि उनमें से किसी को आर्थिक सहायता की अपेक्षा है और आपमें सामथ्र्य है तो आप थोडी सी आर्थिक मदद अवश्य दें। आपकी यह सहायता उन्हें सहारा देगी। साथ ही उनके आशीर्वाद से आपका तन-मन भीग जायेगा। आपको जो सुख सन्तोष की अनुभूति होगी, वह किसी स्वर्ग के आनन्द से कम नहीं आंकी जा सकती।

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