अनमोल वचन

अनमोल वचन

स्वयं को सुखी अनुभव करने के लिये कर्म करो, फल ईश्वर पर छोड दो। सुख पाने में नहीं, त्याग में है। सुख के पीछे पागल होकर दौडने में नहीं, अपितु कर्मशील होकर दुख और मुसीबतों से जूझने में ही सच्चा सुख है। यदि आप दुख को जीत लेते हैं, उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देते, तो आप सुखी हैं। दूसरों के लिये भी जीना सीखो। जो मनुष्य अपने स्वार्थों का त्याग करे, दूसरों के लिये जीना सीखे, उसी को जीने का सच्चा आनन्द मिलता है। इन्सान दुर्बलताओं का पुतला है, वह परिस्थिति का दास बन जाता है। इस तथ्य को स्वीकार करके मनुष्य को दूसरों को उदारता और सहानुभूति के साथ समझने की चेष्टा कर लेनी चाहिए। आप जैसा व्यवहार अपने प्रति चाहते हैं, वैसा ही दूसरों के प्रति करें। अपने मन को टटोलें, यदि आपकी आत्मा आपको चेतावनी देती है तो उसे सुनो। अपने को धोखा देना ही सबसे बडा धोखा है। अपराधी और अन्यायी चाहे समाज से, कानून से बच जाये, पर आत्मा की कचोट उसे चैन से नहीं रहने देगी। प्रायश्चित स्वयं को पवित्र करने के लिये सबसे बडा साधन है, उसकी अग्नि में पापों को नष्ट करने की शक्ति है। प्रायश्चित की अग्नि में तपे बिना पापी की आत्मा पवित्र नहीं हो सकती।

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