अनमोल वचन

अनमोल वचन

गुरू नानक देव जी के कथन ‘नानक दुखिया सब संसार’ को किसी दूसरे ज्ञानी ने अपने इन शब्दों में व्यक्त किया है ‘इस सृष्टि में दुख ही व्यापक है। साथ ही उन्होंने सुख की परिभाषा भी बताई है। उनका कहना है कि दुख का अभाव ही सुख है। देखने में आता है कि सुख, स्वास्थ्य, धन-दौलत, दूध-पूत, यश-मान सभी कुछ न्यूनाधिक मात्रा में होते हुए कुछ व्यक्ति दुखी रहते हैं। इसका कारण तो मात्र असंतोष है, क्योंकि जहां सन्तोष नहीं, वहां सुख की अनुभूति नहीं हो सकती। माना यह भी जाता है कि सुख तो दो दिन का साथी है, दुख ही चिरस्थायी है, किन्तु इस चिरस्थायी साथी से जो समझौता करना जानता है, उसे दुख गहराई तक प्रभावित नहीं कर पाता, क्योंकि दुख-सुख का सम्बन्ध मन की अनुभूति से अधिक है। मनुष्य जीवन की सार्थकता इन सांसारिक रगडों-झगडों से ऊपर उठने में है, नहीं तो आप पर ये हावी हो जायेंगे, आपको पराजित कर आपकी आत्मिक शक्ति को मरोडकर रख देंगे। इसलिए सांसारिक और पारिवारिक पचडों और समस्याओं में फंसकर भी कमल की तरह उससे अलिप्त और अप्रभावित रहना ही बुद्धिमानी है।

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