अनमोल वचन

अनमोल वचन

सभ्य कौन? जिसमें सभ्यता हो, वह सभ्य है, जो सभ्यता के अर्थ को जानता हो। सभ्यता का अर्थ है सामाजिक संवेदनशीलता, जिसकी संवेदना का विस्तार जितना अधिक है, वह उसी के अनुसार सभ्य कहलाने का अधिकारी है, किन्तु अब सभ्यता के अर्थ ही बदल गये हैं। आज सभ्यता का स्तर सम्पन्नता के स्तर से जुड गया है, किन्तु इस सम्पन्नता के कारण समाज में बहुत बडा दोष आ गया है। अपने धंधों में, व्यापार व्यवसाय में इतने व्यस्त हो गये हैं कि बुजुर्गों की नितान्त उपेक्षा की जा रही है। कुछ सम्पन्न लोगों ने तो अपने सभ्यता के उफान में पडकर अपने वृद्धों को वृद्धाश्रम में भेज दिया। वृद्धाश्रम का व्यय करके उन्होंने अपने कत्र्तव्य की इतिश्री कर दी है। अपने पास संयुक्त परिवार में अपने बुजुर्गों को साथ रखने से एक तो उनकी स्वतंत्रता खतरे में पड जाती है, दूसरे वृद्धों के रूप में उनकी सभ्यता उन्हें चुका माल समझकर अपने से दूर रखने में ही अपनी शान समझते हैं, क्योंकि वृद्धाश्रम में उनके भोजन की व्यवस्था को वे बहुत बडा उपकार का कार्य मानते हैं। सोचिये उन वृद्धों के दुख-सुख को, उनकी भावनाओं को अपने मन में वे ‘सभ्य’ कितना स्थान देते हैं। उन्हें यह बात भली प्रकार समझ लेनी चाहिए कि ऐसा असभ्य कार्य करके वे अपनी राह में कांटे ही बो रहे हैं, क्योंकि यह अवस्था उनको भी आयेगी।

Share it
Top