अनमोल वचन

अनमोल वचन

गृहस्थी का भार ढोते, अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करते मनुष्य जब वृद्धावस्था में पहुंचता है, तो स्वाभाविक है पुराने पड गये शरीर में भिन्न-भिन्न प्रकार के रोग अपना डेरा जमा ले, इस लिये बजुर्गों की देखभाल और चिकित्सा बहुत जरूरी है, किन्तु जब से संयुक्त परिवार का चलन कम हुआ है, एकल परिवार का चलन आरम्भ हुआ है, तब से घर के वृद्ध उपेक्षा के शिकार हो गये हैं, बीमारी में भी ठीक प्रकार से देखभाल नहीं होती। उनकी सन्तान को यह समझना चाहिए कि उन्हीं के पालन पोषण और उनको सफल बनाने के दबाव के कारण हमारे ये शुभचिंतक बुजुर्ग और रोगग्रस्त हो गये हैं। ऐसे में उन्हीं के द्वारा प्रदत्त एवं उपार्जित सुविधाओं को भोगते हुए उनकी सेवा सुश्रुषा न करना कृत्घनता, दुष्टता, अनैतिकता एवं कू्ररता है। जिन माता-पिता ने जन्म से लेकर आत्मनिर्भर होने तक, प्रौढता आने तक पालन पोषण, प्रशिक्षण एवं शिक्षा व्यवस्था की, समय-समय पर मार्गदर्शन किया, पग-पग पर सहायता की, उनके प्रति भी सन्तान के मन में कृतज्ञता का न जगना यही सिद्ध करता है कि वह सन्तान मनुष्य से रिक्त हो गई है। दूसरों से नैतिकता अपनाने का आग्रह वह किस मुंह से करेंगे, जिनमें स्वयं इतनी नैतिकता नहीं कि वे अपने ऊपर लदे पितृऋण को उतारने का प्रयास करें।

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