अनमोल वचन

अनमोल वचन

छोटी बुद्धि का व्यक्ति थोडी ही उपलब्धि पर अहंकार करने लगता है। वह परमात्मा का धन्यवाद करने के स्थान पर स्वयं की बुद्धि और परिश्रम के बल पर ही उस उपलब्धि को अर्जित मानता है, यद्यपि उस उपलब्धि में उसके पुरूषार्थ और बुद्धि के साथ दैवी कृपा की भी बहुत बडी भूमिका होती है। कोई धनी हो जाये तो उसमें पैदा हुआ धन का अहंकार ऐसे ठाठ-बाट खडे करता है, जिससे उसकी अमीरी की जानकारी सभी को हो जाये। धन द्वारा बंगला, मोटर, आभूषण, वस्त्र का आडम्बर इतना जमा कर लिया जाता है, जिसके बिना आसानी से काम चल सकता था। विवाह-शादियों में लोग अंधाधुंध पैसा फूंकते हैं, दीवाली पर हजारों, लाखों रूपये बम पटाखों के रूप में हवा में उडा देते हैं, उसके पीछे अपनी अमीरी का विज्ञापन करने के अतिरिक्त और कोई लाभ नहीं होता। महंगी वस्तुएं अनावश्यक मात्रा में खरीदी जाती हैं, कारण केवल अपनी अमीरी की छाप छोडना। कई व्यक्ति दान पुण्य का ढोंग भी करते हैं, यद्यपि उदारता और परमार्थ का अंश मात्र भी उनके भीतर नहीं होता, परन्तु लोगों पर उनकी अमीरी की छाप पडे, यह प्रयोजन जैसे भी पूरा होता है, वे उन्हीं रास्तों को अपनाते हैं।

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