अनमोल वचन

अनमोल वचन

यदि कोई आदमी शरीर से बलिष्ठ हो और उसमें बलिष्ठता का अहंकार उत्पन्न हो जाये तो अधिकांशत: उसकी प्रतिक्रिया गुंडागर्दी के रूप में ही उभरती है। उसमें यही प्रवृत्ति काम करती है कि लोग उसकी ताकत पर अपना ध्यान केन्द्रित करें, उससे भय खायें, उसकी सराहना करें। उस बल का सदुपयोग भी किया जा सकता है, कमजोरों की सहायता करके, उनकी दुष्टों से रक्षा करके, भारी भरकम कार्यों में उन्हें पूरा करने में सहायता करके, सत्कार्य करके, परन्तु ओछे व्यक्ति का दृष्टिकोण इतना परिष्कृत कहां होता है, उसे इस दृष्टिकोण की सूझ भी कहां रहती है। इस प्रकार के चिंतन की योग्यता ऐसे लोगों में कहां बची रहती है। उद्दंडता उनके लिये सरल पडती है। किसी का अपमान कर देना, उसे सताना, तोडफोड करना, अपशब्द कहना, कानून की अवज्ञा करने, मर्यादाओं की उपेक्षा करना, ऐसे कार्यों को ही ऐसे ओछे और अहंकारी लोग आसानी से कर सकते हैं, सो ही वे कर करते हैं, यदि कोई अच्छा व्यक्ति उन्हें अच्छे कार्यों का महत्व बताने और गलत व्यवहार को त्यागने का परामर्श देने का प्रयास करे तो वह उसका अपमान भी कर सकता है, इसलिए अच्छे लोग इन्हें इनके हाल पर ही छोड देते हैं। यदि यह बात उन्हें समझ आ जाये कि यह विशेषता उन्हें प्रभु कृपा से प्राप्त हुई है, वह इसे छीन भी सकता है, तो कदाचित उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो जाये।

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