अनमोल वचन

अनमोल वचन

दुनिया में जहां तक दृष्टि फैलायेंगे, कांटे ही कांटे नजर आयेंगे। इसीलिये कहा जाता है कि यह दुनिया कांटों भरी है। कांटे इतने अधिक हैं कि हम उन सबको बीन नहीं पायेंगे। ये हमारे काबू से बूते से बाहर हैं, परन्तु जो हमारे काबू में है, वह तो हम कर ही सकते हैं। हम अपने पैरों में मजबूत जूते पहन लें और पहनने के बाद दुनिया में जहां-जहां कांटे दिखाई पडते हैं, जहां कहीं भी ठोकर लगने की सम्भावना है, उन ठोकरों वाले स्थानों पर, कांटों वाली जगह पर आप दनदनाते हुए चले जा सकते हैं, तब कोई कांटा हमारे पैर को हानि नहीं पहुंचा सकता और कंकड-पत्थर हमारे पैर को चोट नहीं पहुंचा सकते। कांटे हम बीन नहीं सकते, तो क्या हुआ, हम इतना तो कर ही सकते हैं, दुनिया के हम ठेकेदार नहीं, दुनिया हमारी बनाई हुई नहीं है, न वह हमारी मर्जी के मुताबिक चलेगी। हम एक बार, दो बार उन्हें सुझाव तो दे सकते हैं, परन्तु वे हमारे सुझावों का अनुसरण करें, यह जरूरी नहीं। हम वायदा नहीं कर सकते, क्योंकि दुनिया केवल हमारे लिये तो नहीं बनी है। दुनिया जाने कितने लोगों और भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवों के लिये बनी है और किस उद्देश्य से बनी है, यह सब तो वह जानता है, जिसने यह दुनिया बनाई है, जो इसका मालिक है, हम तो इस दुनिया के अदने से जीव हैं।

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