अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रकृति का प्रत्येक तत्व हमें कुछ न कुछ सीख देता है। सूर्य को लें, इसकी चमकती किरणें गंदे कीचड भरे तालाब में भी पहुंचती है, सडी हुई कलियों में भी, समुद्र में भी जिसका पानी खारा है। हर स्थान पर वहां की गंदगी को वहीं छोडकर मीठा पानी ले लेता है अर्थात बुराई छोडकर अच्छाई ग्रहण कर लेता है। ऐ इंसान तू भी ऐसा सद्गुण अपना ले। हर स्थान से अवगुण छोडकर उसकी उपेक्षा कर वहां की अच्छाईयों को अपने जीवन में धारण कर ले। गंदगी पर कूडे करकट पर भिनभिनाती मक्खी न बन, शहद की मक्खी बन। कडवाहट छोड दे, मिठास ले, हरस्थान से सुगन्ध ले, अच्छाई ले। संसार में ऐसे व्यक्ति बिरले ही होंगे, जिनमें कोई बुराई न हो और ऐसे आदमी भी कोई-कोई हैं, जिनमें कोई अच्छाई न हो। आम तौर से हर आदमी में अच्छाई भी है और बुराई भी है, खूबी भी है खराबी भी, गुण है तो अवगुण भी हैं। दूसरों से अच्छाई ले लो, उसके गुण ले लो, उसकी विशेषताएं ले लो, परन्तु बुराई को देखो भी नहीं। दूसरों के गुणों की प्रशंसा करोगे तो उसके गुण आपके भीतर भी आयेंगे, उनकी बुराईयों, अवगुणों को देखते रहोगे, उन्हीं के विषय में सोचते रहोगे तो वे अवगुण आप में भी आ जायेंगे।

Share it
Share it
Share it
Top