अनमोल वचन

अनमोल वचन

अहंकार बहुत बडा रोग है। इस रोग से जो व्यक्ति ग्रसित हो जाता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, वहां अपनी उपलब्धियों का बखान करता है। अपने को विशिष्ट सिद्ध करने का प्रयास करता है। वह यह अपेक्षा करता है कि सभी उसकी सम्पदा और श्रेष्ठताओं को जानें, उसकी प्रशंसा करें, उसे सम्मान दें। इसीलिए वह समय-समय पर ऐसे प्रदर्शन करता रहता है, ताकि लोग उसे भूल न जायें, भूल गये हो तो फिर याद कर लें। सामाजिक व्यवहार और वार्तालाप में उसका अधिकांश समय आत्म प्रशंसा में ही व्यतीत होता है। वह ऐसे प्रदर्शन करेगा कि जैसे उस जैसे उत्कृष्ट कार्य पहले किसी ने किये ही न हो। स्वयं को बुद्धिमान, धनवान तथा सफलतम सिद्ध करने के लिये हर मार्ग अपनाता है। वास्तव में ऐसा करने की भी कोई आवश्यकता भी नहीं होती, क्योंकि सच्चाई सभी जानते हैं कि कौन कैसा है, किन्तु आदमी का अहंकार उसे चैन से नहीं बैठने देता। इस प्रकार का अहंकार चाहे धन का हो, स्वामित्व का हो, विद्वता का हो अथवा नेतृत्व का हो, प्रत्येक दृष्टि से ओछेपन की निशानी है।

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