अनमोल वचन

अनमोल वचन

बच्चों के जीवन निर्माण में कई चीजों का महत्व है। इन सभी का योगदान उनके विकास में होता है। सबसे प्रथम प्रभाव माता के स्वाभाव, उसका परिवार के साथ कैसा व्यवहार तथा जिस पारिवारिक परिवेश में जन्म लिया है, उसका प्रभाव। उसके पश्चात उसकी संगति तथा उसके शैक्षिक गुरू की शिक्षाओं की छाप उसके मन पर पडती है। सामाजिकता के गुण बच्चे के भीतर बाल्यकाल से ही पैदा होना आरम्भ हो जाते हैं। कई बार माता-पिता अपने बच्चों को उनके बाल साथियों के साथ मिलने-जुलने से रोकते हैं। इससे उनके विकास में अवरोध पैदा होता है। दूसरे बच्चों से मिलने-जुलने से ही उनके भीतर सामूहिकता, सामाजिकता जैसे तत्वों का विकास होता है। आपसी सम्पर्क से ही उनमें एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता का गुण पैदा होता है। इसके विपरीत बच्चों को बिगड जाने के भय से मिलने न देना ठीक नहीं। ऐसे बच्चे आगे चलकर एकाकी, असामाजिक प्रवृत्ति के बन जाते हैं। सामाजिकता से वे अनभिज्ञ ही रहते हैं। संकोची हो जाने के कारण वे हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें संगी साथियों के साथ छूट तो मिलनी चाहिए, परन्तु यह ध्यान रहे कि बच्चा जिन साथियों के साथ रहता है, वे सभ्य तथा संस्कारी हो। कुसंस्कारी तथा आवारा किस्म के संगियों से तो उन्हें बचाये रखना ही उचित है।

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