अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी सन्तान अपने जीवन में ऊंचे से ऊंचे पद को प्राप्त करे, सम्पूर्ण एश्वर्य उसे प्राप्त हो, वे सन्तान के कारण समाज में सिर उठाकर चलें। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के सम्पूर्ण विकास एवं सफलता के लिये उनके भीतर स्पर्धा, प्रोत्साहन एवं प्रेरणा भरी बातों को कहते रहें। उनकी गलतियों और भूलों से पनपने वाली हीन भावना को भी दूर करते रहना चाहिए, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास की अभिवृद्धि एवं मानसिक दृढता प्राप्त होती रहे। जन्म देने से लेकर पालन पोषण करने और उनकी सम्भाल का दायित्व मां के ऊपर होता है, किन्तु शिक्षा, दीक्षा एवं मानसिक विकास से श्रेष्ठ व्यक्तित्व के निर्माण का दायित्व पिता का है। विद्यालय में वह पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करता है, परन्तु जीवन के आन्तरिक एवं बाह्य ढांचे का निर्माण पिता द्वारा ही किया जाता है। इसके लिये पिता द्वारा बच्चे के जीवन के प्रति उनकी प्रत्येक गतिविधि पर दृष्टि रखना चाहिए, मानसिक तुष्टि की अपेक्षा बच्चों को माता-पिता से ही होती है। इसके अभाव में उनका पूर्ण विकास नहीं हो पाता। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ऐसे बच्चे जिन्हें माता-पिता का उचित सम्पर्क और मार्गदर्शन नहीं मिला, वे बहुधा अयोग्य और अविकसित ही रह जाते हैं। जीवन की दौड में वे पिछड जाते हैं।

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