अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रत्येक बच्चे में स्वयं की एक जन्मजात विशेषता होती है। उसकी इस मौलिक प्रवृत्ति पर यदि सचमुच ध्यान दिया जाये तथा उसी के अनुरूप दिशा में उसे बढाया जाये तो वह एक दिन असाधारण व्यक्ति बन सकता है। जिन देशों की शिक्षा प्रणालियों में इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है, उस देश के बच्चे प्रतिभावान होते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के प्रतिभा क्षेत्र की परख करें, स्वयं असमर्थ हो तो किसी विचारशील व्यक्ति की सहायता लें तथा उसी के अनुरूप उनके विकास हेतु दिशा, साधन और सुविधाएं जुटायें। माता-पिता का यह सोचना कि उनकी सोच के अनुसार ही बच्चे का भविष्य बने, एक बडी भूल है। इंजीनियर का बेटा इंजीनियर, डाक्टर का बेटा डाक्टर, प्रशासनिक अधिकारी का बेटा प्रशासनिक अधिकारी बने, यह जरूरी नहीं। यह कोई प्राकृतिक नियम भी नहीं है। रूचि, प्रतिभा और प्रवृत्ति में से अभिभावक एवं बच्चे में विभेद रहना आश्चर्यजनक नहीं। पत्रकारिता में रूचि रखने वाले बच्चे को डाक्टर बनाना, दर्शनिक और चिंतनशील को व्यापार में लगाना, कलाकार को क्लर्क बनाना, व्यापार में रूचि रखने वाले को अध्यापन में लगाना बहुत बडी भूल है। ऐसी भूल बच्चे के नैसर्गिग विकास में अवरोधक होती है, जिसके कारण वह एक सामान्य व्यक्ति ही बनकर रह जाता है।

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